फर्जी जाति प्रमाण पत्र में पकड़े गए चीफ इंजीनियर केके कुटारे, नौकरी से निकालने जा रही सरकार

रायपुर। जाति प्रमाण-पत्र प्रकरण पर उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने बड़ा आदेश पारित किया है। समिति ने प्रधानमंत्री सडक़ योजना के चीफ इंजीनियर के.के. कुटारे के अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र को गलत ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद कुटारे पर सेवा से बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है। छानबीन समिति के चेयरमैन प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा हैं। इसके अलावा समिति में डॉ. सारांश मित्तर, विनीत नंदनवार, लोक शिक्षण संचालक रितुराज रघुवंशी, रमा उइके, डॉ. अनिल वितुलकर और सदस्य सचिव हिना अनिमेष नेताम हैं। छानबीन समिति ने कुटारे के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने की शिकायत की जांच की है।

कुटारे प्रधानमंत्री सडक़ योजना के साथ-साथ प्रधानमंत्री विकास अभिकरण के भी चीफ इंजीनियर हैं। समिति द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण-पत्र सत्यापन संबंधी प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है। यह बताया गया कि जनपद पंचायत डोंगरगांव (जिला राजनांदगांव) के उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौकर और विजय मिश्रा की ओर से मुख्य अभियंता के.के. कुटारे के जाति प्रमाण-पत्र को लेकर वर्ष 2017 से 2025 के बीच कई बार शिकायत की गई थी। इस संबंध में राज्य शासन के आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग से भी पत्राचार हुआ था।

इन शिकायतों के आधार पर उच्च स्तरीय समिति ने मामले को संज्ञान में लेते हुए चीफ इंजीनियर के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता की जांच की प्रक्रिया शुरू की। समिति ने आवेदक को सुनवाई का अवसर भी दिया। जानकारी के अनुसार उन्हें 28 जनवरी 2026 और 5 फरवरी 2026 को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से दोनों तिथियों पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद 23 फरवरी 2026 को समिति की बैठक में प्रकरण फिर रखा गया, हालांकि उस दिन भी आवेदक उपस्थित नहीं हो सके और उन्होंने आवेदन देकर अगली तिथि देने का अनुरोध किया था। प्रकरण में आवेदक ने अपने पक्ष में बताया कि उनके पिता वर्ष 1953 से मध्यप्रदेश के बालाघाट में निवास करते हुए नौकरी कर रहे थे। इसी आधार पर उन्होंने वर्ष 1978 में तहसील वारासिवनी, जिला बालाघाट (मध्यप्रदेश) से जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया था। वर्तमान में उनकी जाति से संबंधित जांच मध्यप्रदेश में भी लंबित बताई गई है।

समिति ने तथ्यों की समीक्षा करते हुए पाया कि आवेदक ने अपना मूल निवास तुमसर स्वीकार किया है। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय एक्शन कमेटी ऑन इश्यू ऑफ कास्ट सर्टिफिकेट बनाम भारत संघ (1994) का उल्लेख किया गया। इस फैसले में स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची राज्य-विशेष होती है और व्यक्ति को उसी राज्य में इसका लाभ मिल सकता है, जहां वह मूल रूप से निवास करता रहा हो। दस्तावेजों की जांच के दौरान तुमसर नगर पालिका के अगस्त 1935 के जन्म रजिस्टर की प्रति भी मिली, जिसमें आवेदक के दादा झुकल्या-गोविंदा का नाम दर्ज है और उनकी जाति खटीक अंकित है। उपलब्ध अभिलेखों और दस्तावेजों के आधार पर समिति ने विस्तृत परीक्षण के बाद कुटारे के अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र को निरस्त करने के आदेश पारित किए हैं। इसके बाद अब कुटारे की बर्खास्तगी की संभावना बढ़ गई है।

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