रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति ने उद्योग जगत का विश्वास अर्जित करने में सफलता पाई है। राज्य सरकार की नीतियों के कारण उद्योगपतियों को यह विश्वास है कि छत्तीसगढ़ में एनपीए की स्थिति नहीं बनेगी।
बघेल ने कहा कि कोरोना संकट के बावजूद छत्तीसगढ़ की नई उद्योग हितैषी नीति के कारण प्रदेश में नये उद्योगों की स्थापना के लिए 132 एमओयू किए गए हैं, जिनमें लगभग 58 हजार 950 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश होगा और 70 हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। बघेल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषि, वन, उद्योग और व्यापार सहित सभी क्षेत्र को लगातार बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना के अनुरूप आने वाले समय में छत्तीसगढ़ विकास के गढ़ के रूप में नई पहचान बनाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश में मंदी का दौर था, राज्य सरकार की नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ आर्थिक मंदी से अछूता रहा। राज्य सरकार ने जहां कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया। वहीं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों, मजदूरों और वनवासियों की जेब में पैसे डालने का काम किया। इसका यह परिणाम हुआ कि लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी और उद्योग व्यापार के सभी सेक्टरों में वृद्धि दर्ज की गई, चाहे आटो मोबाइल सेक्टर हो या सराफा या गारमेंट सेक्टर। बघेल ने कृषि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि नई सरकार के गठन के बाद राज्य सरकार ने किसानों का कर्ज माफ किया, 2500 रुपये प्रति क्विंटल में धान खरीदी का फैसला लिया, जब केन्द्र ने ऐसा करने से रोका, तब राज्य सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ आदान सहायता दी।