अंबिकापुर: तीन दिन की राहत के बाद हिमाचल की सर्द हवाओं ने एक बार फिर कंपकपाना शुरू कर दिया है। पूर्व में खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण भूमध्यसागरीय प्रायदीप के क्षेत्र में सुष्टप अवदाब बनकर दक्षिण भारत के राज्यों को भिगो रहा है। अण्डमान सागर में सक्रिय लो-प्रेशर भी अब तूफान का रूप ले लिया है लेकिन सरगुजा पर इसका विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
इस बार नवम्बर मध्य से ही शहर सहित पूरे सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठण्ड पड़ रही है। खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से हवा की दिशा बदल कर दक्षिण एवं पूर्व हो गई थी जिससे शीतलहर से राहत मिल गई थी तथा न्यूनतम पारा 10.0 के आसपास पहुंच गया था। चक्रवाती परिसंचरण के भूमध्यसागरीय प्रायदीप क्षेत्र की ओर अग्रसर होने के बाद एक बार फिर हवा की दिशा बदल कर उत्तर-पश्चिमोत्तर हो गई है।
हवा की दिशा बदलने के बाद पिछले तीन दिनों से उत्तर एवं पश्चिमोत्तर की हवाएं हिमालय के बर्फ एवं राजस्थान के रेगिस्तान की ठण्डक लेकर पहुंच रही हैं जिससे रात के तापमान में लगातार गिरावट हो रही है। बुधवार को तापमान सामान्य 4.2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने के कारण एक बार फिर सरगुजा छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक ठण्डा इलाका बन गया है।
मौसम विभाग द्वारा बुधवार को न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। ठण्ड बढ़ने के साथ ही छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट में दूर-दूर के पर्यटकों का आवागमन शुरू हो जाता है। पूर्व में दिसम्बर में अधिक ठण्ड पड़ने पर दूर-दूर के पर्यटक पहुंचते थे। इस बार एक सप्ताह पूर्व से ही मैनपाट में पर्यटकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है तथा पर्यटन विभाग के दोनों मोटल पिछले एक सप्ताह से आगामी दिनों तक के लिए फुल है।