बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ ने लॉन्च किया फर्टिलिटी सर्कल

बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, भारत के तीन प्रमुख फर्टिलिटी नेटवर्क्स में से एक, ने फर्टिलिटी सर्कल (1800 123 1515) लॉन्च किया है – भारत की पहली टोल-फ्री और अनरिकॉर्डेड सपोर्ट लाइन। यह फर्टिलिटी काउंसलिंग सेवा पूरे भारत में अंग्रेज़ी और हिंदी में उपलब्ध है, और जल्द ही इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी शुरू करने की योजना है। यह सेवा उन लोगों के लिए है जो प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रहे हैं, पेरेंट्स बनने की कोशिश कर रहे हैं, इससे संबंधी ट्रीटमेंट पर विचार कर रहे हैं या फर्टिलिटी समस्याओं से संभंदित मन में सवाल लिए हुए हैं।

अभिषेक अग्रवाल, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, ने कहा, हमने फर्टिलिटी सर्कल की शुरुआत की है ताकि लोग बिना डर, दबाव और किसी लागत के अपनी फर्टिलिटी संबंधी सभी समस्याओं और उलझनों पर खुलकर बात कर सकें। यह सेवा सुनिश्चित करती है बस कोई उनकी बात सुनने वाला हो और उन्हें सवालों से अकेले नहीं जूझना पड़े।

पारुल त्यागी, चीफ मार्केटिंग ऑफिसर, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, ने कहा कि फर्टिलिटी सर्कल एक ऐसा स्पेस है जहाँ हर सवाल सुना और समझा जाता है – खासकर तब, जब प्रेग्नेंसी और इंफर्टिलिटी जैसे विषयों पर बात करना आसान नहीं होता। फर्टिलिटी हेल्थ के बारे में बातचीत को सामान्य बनाने और इस सपोर्ट का दायरा और उपलब्धता बढ़ाने के लिए हम अलग-अलग संस्थाओं और प्लेटफॉर्म्स के जुड़ रहे हैं।

क्योंकि जब बात प्रेग्नेंसी या फर्टिलिटी समस्याओं से जुड़ी होती है, तो लोग अक्सर चुप रह जाते हैं। कई बार उन्हें समझ नहीं आता कि शुरुआत कहां से करें या किससे बात करें। एक आंतरिक सर्वे में पता चला कि इंफर्टिलिटी का सामना कर रहे 90 प्रतिशत से अधिक लोग भावनात्मक दवाब महसूस करते हैं, लेकिन केवल 29 प्रतिशत लोग ही समय पर मदद लेते हैं। कई लोग मदद लेने में दो साल से भी अधिक समय की देरी कर देते हैं, क्योंकि उन्हें शर्म, उलझन या सही जगह की जानकारी नहीं होती। फर्टिलिटी सर्कल, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की वह पहल है जहाँ पूरी गोपनीयता के साथ, बिना किसी दबाव और जजमेंट के लोगों को फर्टिलिटी से संभंधित सही मागदर्शन मिलेगा।

ग्लोबल रिसर्च के अनुसार हर तीन में से एक व्यक्ति फर्टिलिटी समस्याओं के कारण ज़्यादा तनाव, चिंता या डिप्रेशन महसूस करते हैं। भारत में जो लोग फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रहे हैं, उनमें यह तनाव सामान्य तरीके से गर्भधारण करने वालों के मुकाबले छह से सात गुना ज़्यादा पाया गया है। इसका प्रभाव इमोशनल स्ट्रेस से कहीं अधिक है, जिसमें आधे से अधिक लोगों ने जीवनस्तर की क्वालिटी में गिरावट रिपोर्ट की है और 38 प्रतिशत लोगों का कहना है कि इलाज के बोझ के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने तक का विचार किया है।

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