रवि सरकार, हम,छत्तीसगढ़ एवं भारत के विभिन्न राज्यों में निवासरत बंगाली समाज के प्रतिनिधि,यह मानते हैं कि देश की स्वतंत्रता,सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय निर्माण में बंगाली समाज का ऐतिहासिक योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महानायक और अनेक क्रांतिकारियों ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया,
फिर भी,वर्तमान समय में बंगाली समाज को राज्य एवं राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है,यह स्थिति चिंतनीय है और इसके समाधान हेतु संगठित प्रयास आवश्यक हैं,
हमारी मुख्य मांगें
1. राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भागीदारी
सभी प्रमुख राजनीतिक दल बंगाली समाज को विधानसभा, लोकसभा एवं स्थानीय निकाय चुनावों में उचित संख्या में टिकट प्रदान करें,
राज्य स्तर पर प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी योग्य बंगाली नेतृत्व को अवसर मिले, 2. जनसंख्या के आधार पर भागीदारी
जिन क्षेत्रों में बंगाली समाज की जनसंख्या उल्लेखनीय है,वहाँ से बंगाली प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी जाए,
3. सामाजिक न्याय और आरक्षण संबंधी स्पष्टता,
बंगाली समाज के अंतर्गत आने वाले अनुसूचित जाति/नमोशूद्र आदि वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकारों का पूर्ण लाभ सुनिश्चित किया जाए,
जातीय वर्गीकरण में किसी प्रकार की प्रशासनिक त्रुटि हो तो उसका निराकरण किया जाए,
4. सांस्कृतिक एवं भाषाई सम्मान
बंगाली भाषा एवं लिपि को उन क्षेत्रों में शासकीय मान्यता मिले जहाँ पर्याप्त संख्या में बंगाली समाज निवास करता है,
सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं संस्थानों को सरकारी सहयोग दिया जाए,
*5. युवा नेतृत्व निर्माण*
बंगाली युवाओं के लिए राजनीतिक प्रशिक्षण शिविर,नेतृत्व कार्यशाला एवं सामाजिक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ,
संकल्प
हम यह संकल्प लेते हैं कि—
बंगाली समाज को केवल जिंदाबाद तक सीमित नहीं रहने देंगे,
लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष करेंगे,
सभी समाजों के साथ समरसता रखते हुए अपने राजनीतिक अधिकारों की मांग करेंगे,
यह प्रस्ताव किसी भी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं,बल्कि न्यायपूर्ण भागीदारी और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व के समर्थन में है,हमारा उद्देश्य विभाजन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण और समान अवसर है.