मंदसौर। शुक्रवार को मंदसौर के नई आबादी क्षेत्र में स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय सांसद सुधीर गुप्ता के निवास क्षेत्र के पास स्थित बगीचे में महिलाएं पीपल के पेड़ के नीचे दशा माता की पूजा कर रही थीं। इसी दौरान पेड़ पर लगे मधुमक्खी के छत्ते से अचानक मधुमक्खियां उड़ गईं, जिससे वहां पूजा कर रही महिलाओं में भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, बगीचे में लगभग 50 महिलाएं पूजा कर रही थीं। जैसे ही मधुमक्खियों का छत्ता गिरा और उन्होंने हमला किया, करीब 15 महिलाओं को डंक लगे। इस हमले में दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। बाकी घायल महिलाओं का उपचार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया।
घटना के वक्त महिलाएं पूजा में लीन थीं और अचानक मधुमक्खियों के हमले से सभी घबरा गए। भगदड़ के कारण पूजा अधूरी रह गई। घटनास्थल पर अभी भी पीपल के पेड़ पर दो-तीन मधुमक्खी के छत्ते लगे हुए हैं, जो खतरे की वजह बन सकते हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पहले भी इस पेड़ पर मधुमक्खी का छत्ता था, जिसे पूरी तरह से नहीं हटाया गया। शुक्रवार को फिर वही समस्या सामने आई। उन्होंने प्रशासन से निवेदन किया है कि खतरे को देखते हुए छत्तों को हटाया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।
इस घटना से कॉलोनी में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। महिलाएं और उनके परिवार सदमे में हैं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित महिलाओं को प्राथमिक उपचार दिलाने के साथ-साथ मधुमक्खियों के छत्तों को हटाने की तैयारी शुरू कर दी। सांसद सुधीर गुप्ता ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से इलाके में नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे खतरनाक मधुमक्खी के छत्तों को हटाने और पुनः निर्माण रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पीपल और अन्य वृक्षों में मधुमक्खी के छत्ते अक्सर बन जाते हैं, और यदि उन्हें समय पर हटाया न जाए तो यह लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए मधुमक्खियों के हमले से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। स्थानीय प्रशासन ने कहा कि क्षेत्र में आपातकालीन टीम को तैनात किया गया है और सभी बगीचों और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। साथ ही, लोगों को सतर्क रहने और मधुमक्खियों के छत्तों के पास न जाने की सलाह दी गई है। यह घटना यह दर्शाती है कि साधारण दिखने वाले प्राकृतिक तत्व भी अचानक खतरनाक रूप ले सकते हैं। सुरक्षित पूजा और सार्वजनिक आयोजनों के लिए आवश्यक है कि पेड़ों और अन्य स्थानों पर संभावित खतरों की पहचान की जाए और समय रहते उनका निवारण किया जाए।