बीबीएन। हिमाचल की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाला बीबीएन क्षेत्र आज सबसे गंभीर बुनियादी संकट से जूझ रहा है। प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए टैक्स और जीएसटी वसूल रही है, मगर बदले में उद्योगों को मिल रही हैं टूटी सडक़ें, मौत को न्योता देते गड्ढे और दिन-रात ठप पड़ती बिजली। हालत ऐसे हैं कि उत्पादन ठप, माल ढुलाई बाधित और निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगा है। दरअसल सरकारें जब-जब विकास की गाथा गिनाती हैं, बीबीएन का नाम सबसे आगे रखती हैं। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि आज यहां की दो सबसे अहम जीवनरेखाएं-सडक़ और बिजली-खुद वेंटीलेटर पर हैं। कारोबारियों का धैर्य अब टूट चुका है और सवाल सीधा है।
क्या बीबीएन सिर्फ टैक्स वसूली का ज़रिया है। काबिले जिक़्र है कि बद्दी-नालागढ़ नेशनल हाईवे और उससे जुड़े मार्ग उद्योगों के लिए धमनियों का काम करते हैं। मगर इन दिनों यह मार्ग गड्ढों और अव्यवस्थित निर्माण का शिकार होकर मौत के जाल में बदल गए हैं। बरसात में सडक़ें तालाब बन जाती हैं और गाडिय़ों की लंबी कतारें जाम में फंसी रहती हैं। उद्योगपति बताते हैं कि अधर में लटका फोरलेन प्रोजेक्ट कारोबार के लिए सबसे बड़ी बाधा है। नालागढ के उधमी आरजी अग्रवाल कहते हैं की हाईवे पर सफर अब आफत से कम नहीं। माल ढुलाई समय पर नहीं हो पाती, गाडिय़ां खराब होती हैं और ग्राहक नाराज़ हो जाते हैं। कारोबार का भरोसा ही डगमगा रहा है। गड्ढों से भरे मार्गों पर आए दिन ट्रक पलटते हैं और लाखों की मशीनरी डैमेज होती है। कई बार तो फैक्ट्री तक पहुंचने से पहले ही माल बर्बाद हो जाता है। कारोबारियों का कहना है कि रोज़ाना की यह परेशानी अब उद्योगों के लिए जानलेवा बन चुकी है।