जब उठाउं निगाह इक तेरा दीदार मिले,
तेरी आगोश में अमनो सुकूं बहार मिले,
ऐ वतन तेरी ये संदल सी ज़मीं छत्तीसगढ़-
जब भी लूं जन्म तेरी गोद ही हर बार मिले।।
जी हां
भारतीय हिन्दी सेवा पंचायत द्वारा रजिस्टर्ड
काव्य कुंभ बिल्सी बदायूं उ० प्र०की पावन धरा
में, लौह नगरी बचेली छत्तीसगढ़ की
कवियत्री शकुन शेंडे संघर्ष कुंवर अंकित चौहान, जेल अधीक्षक डाक्टर विनय कुमार दुबे उपखंड मजिस्ट्रेट व आयोजन के पदाधिकारियों द्वारा हुई सम्मानित।
देश भर के अनेक राज्य से एक सौ एक कवि आमंत्रित थे जिसमें साहित्यकारों ने इस काव्य गंगा की रस धार में अपनी अपनी भागीदारी बड़ी ही जिम्मेदारी से निभायी, और हज़ारों रसज्ञ श्रोताओं की पिपासा ने, जी भर के चौबीस घंटे इस रस भरी निर्झरणी में डूबकी लगायी। जिसमें प्रशासनिक अधिकारी से लेकर जन प्रतिनिधि जनसेवक विधायक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

इस तारतम्य में अपने छत्तीसगढ़ के माटी की खुशबू जनमानस में बिखेरती शकुन शेंडे ने सर्वप्रथम अपनी सुरीली तान से सरस्वती वंदना कर कार्यक्रम का सुंदर आगाज किया। और कुछ ही क्षणों में अपनी माटी की महिमा से लोगों को सराबोर कर दिया, और तालियों की गड़गड़ाहट से श्रोताओं का अपार स्नेह व छत्तीसगढ़ के लिए विशेष सम्मान अर्जित किया।तत्पश्चात सात सत्र में देश भर से एक से बढ़कर एक काव्य मनीषियों ने सुरमयी काव्य धारा बहायी।
इस शुभ अवसर पर कवियत्री ने मुख्य अतिथि को अपनी पुस्तक महुआ मंजरी भी भेंट की।
छत्तीसगढ़ से एकमात्र कवियत्री शकुन शेंडे संघर्ष ही इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आमंत्रित थी।
आयोजकों ने भी गजब की व्यवस्था की थी रहने, खाने की ।
बचेली वासियों के अपार स्नेह और दुआओं से ही यह सब संभव हो पाया।