विशेषज्ञ पृष्ठभूमि वाले ही बन सकेंगे बाल कल्याण समिति एवम किशोर न्याय बोर्ड में सदस्य
1 सितंबर से लागू हुआ नया किशोर न्याय अधिनियम
सक्ती-किशोर न्याय अधिनियम में नवीन संशोधन बाल संरक्षण और कल्याण के जुड़े को तुलनात्मक रूप से अधिक प्रभावी औऱ परिणामोन्मुखी बनाने का कार्य करेंगे।नए संशोधन एक सितंबर से प्रभावशील हो गए है, और अब दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया जिला कलेक्टरों के माध्यम से पूर्ण की जायेगी। यह जानकारी राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 115 वी ई कार्यशाला को संबोधित करते हुए दी।कार्यशाला में देशभर से करीब 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कानूनगो ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत अब बाल कल्याण समितियों में इस विशेषज्ञ पृष्ठभूमि वाले लोगों को ही नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए शैक्षणिक पृष्ठभूमि निर्धारित कर दी गईं है।साथ ही समिति के सदस्यों को अगले कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बनने का रास्ता खोल दिया गया है।उन्होंने बताया कि जेजेबी में दोनों अशासकीय सदस्य लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्ति के लिए पात्र घोषित कर दिए गए है।बच्चों के गोद लेने की प्रक्रिया का भी नए संशोधन में सरलीकरण कर दिया गया है अब एडॉप्शन की प्रक्रिया न्यायालय में संचालित होने के स्थान पर जिला दंडाधिकारी के कार्यालय से संपादित होगी और अब जोन वार गोद लेने की नई प्रक्रिया संस्थित की गई है ताकि बच्चों और नए परिवार के मध्य सामाजिक,सांस्क्रतिक औऱ पारिवारिक परिवेश में बुनियादी समस्याएं नही आये, कानूनगो के अनुसार जिन संस्थाओं को एफसीआरए के तहत विदेशी सहायता मिलती है उनसे संबद्ध सामाजिक कार्यकर्ता या पदाधिकारी अब बाल कल्याण समितियों में सदस्यता के लिए पात्र नही होंगे। इसके अलावा बाल देखरेख संस्थाओं में सतत निरीक्षण के लिए जिला कलेक्टरों को समयबद्ध दायित्व भी सौंपे गए है। कानूनगो के अनुसार संस्थाओं में रहने वाले बालकों के लिए निर्धारित आईसीपी एवं एसआईआर के प्रारूप भी नए सिरे से डिजाइन किए गए ताकि बालकों के पारिवारिक औऱ सामाजिक सुमेलन को औऱ अधिक प्रभावी एवं प्रामाणिक बनाया जा सके,चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन के सचिव डॉ कृपाशंकर चौबे ने बताया कि नए संशोधनों को लागू कराने में सीसीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है क्योंकि जिन दस प्रमुख सुझावों को फाउंडेशन ने मप्र की ओर से भारत सरकार को भेजा था उनमें से आठ राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो की सहायता से स्वीकार कर लिए गए है,कार्यशाला में इस सप्ताह सीधी जिले के बच्चों ने विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। सीधी की बाल कल्याण समिति अध्यक्ष मोनिका श्रीवास्तव के नेतृत्व में जिले के बच्चों ने इस कार्यशाला में भागीदारी की।फाउंडेशन के विषय विशेषज्ञ डॉ के के दीक्षित,वसुंधरा सचदेवा,राकेश अग्रवाल,डॉ कृपाशंकर चौबे,राधा मिश्रा,रविन्द्र ओझा,अभय खुरानिया अनिल गौर एवं जिला जांजगीर चाम्पा से नम्रता पटेल अध्यक्ष बाल कल्याण समिति एवम सुरेश कुमार जायसवाल सदस्य किशोर न्याय बोर्ड ने बच्चों के सवालों का समाधान करते हुए राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो से रूबरू होते हुए जेजे एक्ट में हुए संशोधनों के संबंध में अपने सवाल रखें।