भय और भ्रम फैलाने वालों को दो टूक — “किसी भी वर्ग को डरने की जरूरत नहीं” : दीपिका शोरी

सुकमा। जिले में आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को कमजोर करने की कोशिशों पर कड़ा संदेश देते हुए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने स्पष्ट कहा है कि सुकमा शांतिप्रिय जिला है और यहां किसी भी वर्ग को डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने भ्रम फैलाने और भड़काऊ बयान देने वालों को “गंदी मानसिकता से बाहर निकलने” की नसीहत दी।
विदित हो कि पड़ोसी राज्य मलकानगिरी में दो वर्गों के बीच बने तनावपूर्ण हालात के बीच सुकमा के एक नेता का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अन्य प्रदेशों से आए लोगों के खिलाफ स्थानीय लोगों को संबोधित किया गया है। इस वीडियो के कारण वर्षों से जिले में निवास कर रहे अन्य वर्गों के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
इस पूरे मामले पर बिना किसी का नाम लिए दीपिका शोरी ने सख्त और संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग कानूनी जानकारी से वंचित हमारे भोले-भाले आदिवासी भाई-बहनों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सुकमा की पहचान आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे से है, जहां वर्षों से आदिवासी समाज और अन्य प्रदेशों से आए लोग मित्रवत, सखा और पारिवारिक रिश्तों के साथ रहते आए हैं।
दीपिका शोरी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि किसी एक व्यक्ति के गलत आचरण के आधार पर पूरे समाज को दोषी ठहराना न केवल गलत है बल्कि सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की साजिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भड़काऊ भाषणों के प्रभाव में आकर कोई अप्रिय घटना होती है, तो क्या ऐसे बयान देने वाले इसकी जिम्मेदारी लेंगे?
उन्होंने कहा कि यदि कानूनी अज्ञानता के कारण आदिवासी भाई-बहन कानून अपने हाथ में लेते हैं, तो उन्हें जीवनभर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ सकते हैं — क्या इसकी जिम्मेदारी भड़काने वाले लोग उठाएंगे?
दीपिका शोरी ने दो टूक कहा कि आदिवासी समाज की चिंता करने का दावा करने वालों को पहले यह सोचना चाहिए कि उनके पास राशन कार्ड है या नहीं, विधवाओं और निराश्रितों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिल रही है या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए आदिवासी समाज का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो बिल्कुल अस्वीकार्य है।
अन्य प्रदेशों से आकर सुकमा में निवास कर रहे लोगों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि डरने की नहीं, बल्कि सचेत रहने की जरूरत है। भारत का संविधान हर नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में रहने और जीवन यापन करने का अधिकार देता है। उन्होंने सभी से संविधान पर विश्वास रखते हुए आदिवासी समाज के साथ पहले की तरह एक परिवार बनकर, आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ रहने की अपील की।
अंत में दीपिका शोरी ने कहा कि यह विष्णु का सुशासन है, जहां सभी के साथ न्याय होगा, अन्याय की कोई जगह नहीं है और गलत मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।
इस पूरे घटनाक्रम में दीपिका शोरी की भूमिका आदिवासी और सामान्य वर्ग के बीच प्रेम, शांति और सामाजिक समरसता को मजबूत करने वाली एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में सामने आई है, जिन्होंने समय रहते सुकमा की शांत छवि को बचाने का संदेश दिया।

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