बिलासपुर। अपोलो हास्पिटल के दो आइसीयू वार्ड के बीच दीवार पर बिजली के तार पर लगी आग को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है, इसे अपोलो अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। क्योंकि हालात बिगड़ते तो भर्ती 50 से 60 मरीजो की जान आफत में आ जाता। पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ डाक्टर अनिल श्रीवास्तव ने पूरे मामले को जांच के दायरे में ले लिया है।
गुरुवार की शाम अपोलो अस्पताल के आईसीयू की दीवार पर लगी वायरों में आग लग गई। कुछ ही देर में इसने तेजी से भीषण रूप ले लिया। वहीं आइसीयू वार्ड के भीतर धुंआ भर गया। इससे मरीज, स्वजन व स्टाफ के बीच अफरा-तफरी मच गई। धुआं के कारण मरीजों की सांसें फूलने लगी थी। फिर आनन-फानन में स्टाफ व सुरक्षाकर्मियों ने सभी मरीजों को वार्ड से बाहर निकाला।
सूचना पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर ले देकर काबू पाया गया। इसके बाद मामले के शुरुआती जांच में यह बात सामने आया है कि शार्ट सर्किट की वजह से आग लगा है। लेकिन आग लगने के बाद अस्पताल के फायर सिस्टम अपडेट नहीं होने की वजह से आग चंद मिनट में बेकाबू हो गया।
वही अब इस पूरे मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है, क्योंकि जरा भी गड़बड़ी होती तो इसके गंभीर परिणाम भर्ती मरीज, स्वजन और स्टाफ को झेलना पड़ सकता था, ऐसे में लापरवाही की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को पूरे मामले की जांच करने के आदेश दे दिए हैं।