सक्ति-“साहित्य मधुशाला” द्वारा ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन शनिवार 28 मई को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जाने माने कवि एवं जैन कवि संगम कर्नाटक के अध्यक्ष जैन राजेंद्र गुलेच्छा “राज” बैंगलोर ने की। संस्था की संस्थापिका मैसूर की सुप्रसिद्ध कवित्रि एवं अग्र ज्योति पत्रिका की संपादिका उषा जैन केडिया जी ने सुंदर एवम् काव्यात्मक अन्दाज़ में संचालन कर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए
इस गोष्ठी में देश विदेश के चुनिंदा कवि-कवित्रीयो ने भाग लेकर अपनी रचनाओं का पाठ किया,कार्यक्रम की शुरुआत जमशेद पुर से वसंत जमशेदपुरी जी द्वारा “हे शारदे माँ…अपनी वीणा मधुर बजाओ” की सरस्वती वंदना से हुई। संगीता चौधरी जी ( कोलकाता) ने महंगाई का रोना रोनेवालों पर उनके द्वारा किए जा रहे आडम्बर भरे खर्चों पर कटाक्ष करती अपनी रचना “कहते है सुरसा के मुँह सी महंगाई” पेश की। काठमाण्डू नेपाल से वरिष्ठ साहित्यकार जयप्रकाश अग्रवाल ने अपनी नज्म “लिख नयी इबारत खून से बंदे” के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त की
प्रमोद खीरवाल (टाटानगर) ने “सोया हुआ सनातन जाग उठा” तथा उपासना सिन्हा (जमशेदपुर) ने तरन्नुम में अपनी गज़ल “हे बेनाम रिश्ता सा” प्रस्तुत कर समाँ बाँध दिया। लक्ष्मीसिंह “रूबी” जी( जमशेदपुर) ने अपनी सुमधुर आवाज़ में “इब्दिताएँ इश्क को हसीन नाम दे देना” गज़ल सुनाई। वसंत जमशेदपुरी ने “मुझे वो शक्ति दो दाता जगत की पीर लिख दूँ” एवम् भगवान शिव की महिमा दर्शाती अपनी कविताएँ प्रस्तुत की। वही प्रेमलता गोयल (अम्बिकापुर) ने सिपाहियों को समर्पित अपनी क्षणिका पढ़कर सुनाई

संचालिका उषा जैन केडिया ( मैसूर) ने “फुर्सत न मिली तुमको चौखट पर उसके जाने की” रचना के माध्यम से वृद्धाश्रम में पल रही माँ के दयनीय हालत उजागर कर गोष्ठी को संवेदनशील बना दिया,अध्यक्ष राजेन्द्र गुलेच्छा ने प्रस्तुत समस्त रचनाओं पर अपनी सार्थक समीक्षाएँ प्रस्तुत करने के साथ ही अपनी रचना “मुखौटा” एवम् संकल्प से सिद्धि” सुनाकर भरपूर वाही वाही लूटी
गोष्ठी का समापन संगीता चौधरी के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।उमा बंसल ओमप्रकाश अग्रवाल व अन्य श्रोता गन गोष्ठी में सम्मलित हुए