शिवरीनारायण में 8 से 10 अप्रेल तक देश-प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे
8 अप्रैल ममता चंद्राकर,9 अप्रेल को अनुराधा पौडवाल, और 10 को अनूप जलोटा और दिलीप षड़ंगी सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण होंगे
सक्ती-राज्य स्तरीय मानस मंडली प्रतियोगिता और राम वन गमन परिपथ के कार्यों के लोकार्पण कार्यक्रम के अवसर पर शिवरीनारायण में 8 अप्रैल से 10 अप्रैल तक छत्तीसगढ़ और देश के सुप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भजनों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी,राम वन गमन पर्यटन परिपथ सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत 8 अप्रेल को दोपहर 12.00 बजे से 5.45 बजे मानस गायन की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता, सायं 6.00 बजे छत्तीसगढ़ की स्वर कोकिला पद्मश्री ममता चंद्राकर की प्रस्तुति। 9 अप्रैल को दोपहर 12.00 से शाम 5.45 बजे मानस गायन की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, सायं 6.00से 6.30 बजे सांस्कृतिक प्रस्तुति, सायं 6.45 बजे सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका अनुराधा पौडवाल की प्रस्तुति होंगी,10 अप्रैल को दोपहर 12.00 बजे से 2.30 बजे तक मानस गायन की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता, दोपहर 3.00 बजे, जस गीत सम्राट दिलीप षडंगी की प्रस्तुति, सायं 6.00 बजे मानस गायन (विजेता मंडली की प्रस्तुति ), सायं 6.30 से 7.30 बजें महानदी आरती, बाबा घाट, सायं 7.30 बजे दीक्षांत समूह, खैरागढ़ द्वारा राम-शबरी प्रसंग पर आधारित नृत्य नाटिका, सायं 8.00 बजे भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा की प्रस्तुति होगी।
जांजगीर-चाम्पा कलेक्टर जितेन्द्र कुमार शुक्ला ने उक्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील नागरिकों से की है
आकार लेने लगी है छत्तीसगढ़ में पर्यटन तीर्थों की नयी श्रृंखला,चंदखुरी के बाद शिवरीनारायण में भी विकास का काम पूरा हुआ,10 अप्रैल को लोकार्पित करेंगे मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल,08 अप्रैल से शुरू हो जाएगा तीन दिवसीय भव्य लोकार्पण समारोह

छत्तीसगढ़ से जुड़ी भगवान श्रीराम के वनवास काल की स्मृतियों को सहेजने तथा संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में चयनित 9 पर्यटन तीर्थों का तेजी से कायाकल्प कराया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत इन सभी पर्यटन तीर्थों की आकर्षक लैण्ड स्कैपिंग के साथ-साथ पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास भी किया जा रहा है। 139 करोड़ रूपए की इस परियोजना में उत्तर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से लेकर दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले तक भगवान राम के वनवास काल से जुड़े स्थलों का संरक्षण एवं विकास किया जा रहा है। चंदखुरी के बाद अब शिवरीनारायण में भी विकास कार्य पूरा हो चुका है, जिसका लोकार्पण 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे। इसके लिए तीन दिवसीय भव्य समारोह की शुरुआत 08 अप्रैल से हो जाएगी,मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर में वर्ष 2019 में भूमिपूजन कर राम वनगमन पर्यटन परिपथ के निर्माण की शुरूआत की थी। इस परिपथ में आने वाले स्थानों को रामायणकालीन थीम के अनुरूप सजाया और संवारा जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन की इस महात्वाकांक्षी योजना से भावी पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति से परिचित होने के अवसर के साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को उच्च स्तर की सुविधाएं भी प्राप्त होगी।

07 अक्टूबर 2021 को तीन दिवसीय भव्य राष्ट्रीय आयोजन के साथ माता कौशल्या मंदिर, चंदखुरी के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णाेद्धार कार्याे का लोकार्पण मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है, जिसके पश्चात् पर्यटकों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जो कि राम वनगमन पर्यटन परिपथ निर्माण की सफलता का परिचायक है,छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परम्परा में प्रभु श्री राम रचे-बसे है। जय सिया राम के उद्घोष के साथ यहां दिन की शुरूआत होती है। इसका मुख्य कारण है कि छत्तीसगढ़ वासियों के लिए श्री राम केवल आस्था ही नहीं है बल्कि वे जीवन की एक अवस्था और आदर्श व्यवस्था भी हैं। छत्तीसगढ़ में उनकी पूजा भांजे के रूप में होती है। रायपुर से महज 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंदखुरी, आरंग को माता कौशल्या की जन्मभूमि और श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कोसल है,रघुकुल शिरोमणि श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या है लेकिन छत्तीसगढ़ उनकी कर्मभूमि है। वनवास काल के दौरान अयोध्या से प्रयागराज, चित्रकूट सतना गमन करते हुए श्रीराम ने दक्षिण कोसल याने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के भरतपुर पहुंचकर मवई नदी को पार कर दण्डकारण्य में प्रवेश किया। मवई नदी के तट पर बने प्राकृतिक गुफा मंदिर, सीतामढ़ी-हरचौका में पहुंचकर उन्होनें विश्राम किया। इस तरह रामचंद्र जी के वनवास काल का छत्तीसगढ़ में पहला पड़ाव भरतपुर के पास सीतामढ़ी-हरचौका को माना जाता है,

छत्तीसगढ़ की पावन धरा में रामायण काल की अनेक घटनाएं घटित हुई हैं जिसका प्रमाण यहां की लोक संस्कृति, लोक कला, दंत कथा और लोकोक्तियां हैं,राम वन गमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत प्रथम चरण में सीतामढ़ी-हरचौका (जिला कोरिया), रामगढ़ (जिला सरगुजा), शिवरीनारायण (जिला जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (जिला बलौदाबाजार), चंदखुरी (जिला रायपुर), राजिम (जिला गरियाबंद), सप्तऋषि आश्रम सिहावा (जिला धमतरी), जगदलपुर और रामाराम (जिला सुकमा) को विकसित किया जा रहा है,कोरिया जिले का सीतामढ़ी रामचन्द्र जी के वनवास काल के पहले पड़ाव के नाम से भी प्रसिद्ध है। पौराणिक और ऐतिहासिक ग्रंथों में रामगिरि पर्वत का उल्लेख आता है। सरगुजा जिले का यही रामगिरी-रामगढ़ पर्वत है। यहां स्थित सीताबेंगरा- जोगीमारा गुफा की रंगशाला को विश्व की सबसे प्राचीन रंगशाला माना जाता है। मान्यता है कि वन गमन काल में रामचंद्र जी के साथ सीता जी ने यहां कुछ समय बिताया था