रायपुर: छत्तीसगढ़ के धर्म संसद में महात्मा गांधी को लेकर अभद्र टिप्पणी करने पर राजद्रोह के आरोपी कालीचरण महाराज की रिहाई नहीं हो पाई है। जेल प्रशासन ने महाराष्ट्र की अदालत के किसी डॉक्यूमेंट को लेकर कालीचरण को रिहा नहीं किया। जेल प्रशासन ने नियमों के तहत दस्तावेजों की मांग की है। शनिवार को भी समर्थक और वकील कालीचरण महाराज की रिहाई के लिए पहुंचे थे। भाजपा ने जेल प्रशासन पर जबरन मामला अटकाने का आरोप लगाया है।
बता दें कि कालीचरण महाराज की जमानत याचिका पर शुक्रवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई थी। जमानत से पहले अरविंद सिंह चंदेल की कोर्ट में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। फिर शाम को उच्च न्यायालय ने कालीचरण महाराज को जमानत दे दी। आदेश की कापी मिलने के बाद कालीचरण की रिहाई के लिए समर्थक व वकील जेल पहुंचे, मगर जेल प्रशासन ने महाराष्ट्र के अदालत से दस्तावेज नहीं आने की बात कहते हुए कालीचरण महाराज को रिहा नहीं किया। जेल परिसर के बाहर इकठ्ठा हुए समर्थकों में शामिल भाजपा नेता और पेशे से वकील विश्वदिनी पांडे ने कहा कि यह हिंदू भावनाओं का अपमान है।
विश्वदिनी ने कहा कि जानबूझकर कालीचरण महाराज को रिहा नहीं किया जा रहा है। जेल प्रशासन के पास मेल के माधयम से दस्तावेज पहुंचा दिए गए हैं, मगर अब कुछ डाक्यूमेंट्स स्पीड पोस्ट के जरिए महाराष्ट्र से मंगवाने की बात की जा रही है, यह सही नहीं है। जेल परिसर के बाहर रविवार को 3 घंटे तक कालीचरण के समर्थक डटे रहे और जय श्रीराम और ओम काली के नारे लगाते रहे। इससे पहले शनिवार को भी इसी प्रकार समर्थक और वकील कालीचरण की रिहाई के लिए जेल पहुंचे थे। सोमवार को डाक्यूमेंट्स पहुंचने के बाद कालीचरण महाराज को रिहा करने की बात कही जा रही है।