साथी ने कहा – तुम्हारी आंखें डायन जैसी है, फिर मैंने निगेटिव रोल चुन लिया: अभिनेत्री सुधाचंद्रन

रायपुर। नाच मयूरी फेम अभिनेत्री सुधाचंद्रन को भला कौन नहीं जानता, स्वयं के सामर्थ्य का वो एक बड़ा उदाहरण हैं। अदम्य इच्छाशक्ति के सहारे एक पैर न होने के बाद भी आज वो एक अच्छी नृत्यांगना हैं। उनकी अभिनय कला भी लोगों को मोहित करती है। जो नियमित रूप से टीवी सीरियल देखते हैं, वो सुधा को खलनायिका के रूप में जानते हैं। सुधा, रविवार को रायपुर आई।

यहां पत्रकारों के प्रश्न पर उन्होंने बताया कि पहले मैं पाजीटिव रोल करती थी। एक दिन, एक साथी कलाकार ने कहा कि तुम निगेटिव रोल करो क्योंकि तुम्हारी आंखें डायन की तरह हैं। पहले बुरा लगा पर बाद में खूब सोचा। अंतत: मैंने निगेटिव भूमिकाओं में स्वयं को अधिक फिट पाया। मुस्कुराते हुये उन्होंने कहा-उसके बाद ऐसी इतनी भूमिकाएं मिली मानो मैं निगेटिव रोल के लिये ही बनी हूं।

पुस्तकें मिल जाये तो पूरा पढ़कर ही खाती थी खाना

सुधा ने कहा कि पुस्तकों से प्रेम करना उन्हें विरासत में मिला है। आज कभी कोई पुस्तक मिल जाए तो उन्हें पूरा पढ़कर ही खाना खाती हूं। यानी पुस्तकों से पुराना नाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकन से लेकर भारतीय पुस्तकें उन्हें बहुत पसंद हैं। बता दें कि मूलत: केरल की है। जो फिल्म जगत में अलग ही छाप छोड़ी है।

संघर्ष अवश्य करना चाहिए

सुधा ने कहा कि जब किसी भी परेशानी आए तो उससे डटकर लड़ना चाहिए। हारेंगे या जीत होगी, यह नहीं सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे संघर्ष करना मेरे माता-पिता ने सिखाया है। अभी मेरा पति भी कहते है, जाओ लड़कर आओ। उन्होंने कहा कि मेरे पति भी, मेरे पिता की तरह हैं। वो भी किसी काम के लिए कभी नहीं रोकते है, बल्कि सदा प्रेरित करते हैं। सुधा ने कहा कि कला के क्षेत्र में जब भी अवसर मिले, उसे भुना लेना चाहिये। इससे रास्ते खुल जाते हैं।

उद्यमियों सुधा, लर्निग बैगर्स नामक संस्था के कार्यक्रम में रायपुर आई थी। संस्था ने यहां छत्तीसगढ़ के उद्यामियों से जुड़ी चुनौतियों में सहयोग करने के उद्देश्य से रविवार को एक आयोजन किया। यहां छत्तीसगढ़ के 200 से अधिक इंटरप्रेन्योर्स शामिल हुए। इस मौके पर प्रदेश उद्यामियों ने भी अपनी सक्सेस स्टोरी सुनाई।

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