व्यंग्यम के होली मिलन में रचनाओं की “फाग फुहार”

अंबिकापुर। साहित्यिक संस्था व्यंग्यम के तत्वावधान में होली और विश्व कविता दिवस के अवसर पर वार्षिक कार्यक्रम काव्य सम्मेलन “फाग फुहार” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कार्यक्रम की अध्यक्षता दिवाकर शर्मा ने की। वंदना दत्ता मुख्य अतिथि थीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में चन्द्र भूषण मिश्रा, सुधीर पाठक,अजय चतुर्वेदी रहे। कार्यक्रम की शुरूआत में संस्थापक, संरक्षक डा. सपन सिन्हा ने संस्था का संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि यह संस्था सन् 1996 से संचालित है । अब पुनः इसे सार्थक दिशा के रूप में आगे बढ़ायेंगे।

काव्य सम्मेलन की शुरूआत में विनोद हर्ष ने रचना सुनाई-

उदास हो जायेंगे गीत सारे ।

मीना वर्मा की रचना,

अब के बरस कुछ ऐसे बीते रास ना आई होली रे। रंग रहा बेरंग सजी ना मौसम की ओ मस्ती रे।

संतोष दास सरल ने

मुझमें जो बुराई है वो मेरी ही कमाई है।मुझमें जो अच्छाई है वो मैंने तुमसे पाई है।

पूनम दुबे वीणा ने गीत प्रस्तुत किया-

होली खेलन आये कान्हा राधा की नगरिया।

संगठन सचिव प्रकाश कश्यप प्रेम व्यवहार की रचना प्रस्तुत की,

जीवन नीरस न रहे, रहे प्रेम व्यवहार।

सीख हमें देते यही यह पावन त्यौहार।

 

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