खुद कमाई कर आत्मनिर्भर बने छत्तीसगढ़ के 28 सौ गोठान

रायपुर । राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना ने बड़ा बदलाव लाया है।सूबे के 28 सौ गोठान अब आत्मनिर्भर बनकर कमाई करने लगे है।सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि गोठान स्वावलंबी हो चुके है।दो सालों में 12.60 करोड़ रुपये का गोबर खुद की कमाई से खरीद चुके है। सूबे में साल 2020 में गोधन न्याय योजना की शुरूआत हुई थी।

जानकारी के मुताबिक राज्य के 28 सौ गोठान स्वावलंबी हो चुके हैं। यह संख्या राज्य में निर्मित एवं संचालित गोठानों की संख्या का एक तिहाई से भी अधिक है। यहीं नहीं स्वावलंबी गोठान अब स्वयं की राशि से गोबर खरीदी और गोठान की व्यवस्था संभालने लगे हैं। इन गोठानों ने अब तक 12 करोड़ 60 लाख रुपये का गोबर स्वयं की राशि से खरीदा है।

15 लाख 29 हजार क्विंटल से अधिक कम्पोस्ट खाद का उत्पादन

गोठानों में अब तक महिला समूहों की मदद से 15 लाख 29 हज़ार क्विंटल से अधिक कम्पोस्ट खाद का उत्पादन किया है। गोबर विक्रेताओं, गोठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को पांच करोड़ 38 लाख रुपये की राशि अब तक जारी की जा चुकी। छत्तीसगढ़ के गोठान और गोधन न्याय योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब राष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा होने लगी है।और देखादेखी में कुछ राज्य सरकारे भी इस योजना को अपने यहां अपनाने की तैयारी कि ही है।

129 करोड़ का हो चुका भुगतान

अधिकारियों ने बताया कि गोधन न्याय योजना के तहत सरकार दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मवेशियों का गोबर खरीदती है। इसके लिए गोठान समितियां बनी हुई हैं। इस योजना की शुरुआत 2020 में हुई थी। तब से अब तक सरकार गोबर विक्रेताओं को 129 करोड़ 86 लाख रुपये का भुगतान कर चुकी है। खरीदे गए गोबर से समितियां कम्पोस्ट के अलावा विभिन्न तरह की उपयोगी व्यावसायिक सामग्री का निर्माण करती हैं।

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