रायपुर । नवा रायपुर प्रभावित 27 गांवों के किसान करीब 60 दिन से धरने पर बैठे हुए हैं। इस बीच सरकार ने उनकी छह मांगों पर सहमति दे दी है। साथ ही 13 गांवों में जमीन का पट्टा वितरण के लिए कार्यक्रम भी जारी कर दिया है। इसकी शुरुआत सात मार्च को कायाबांधा गांव से होगी। सरकार की इस पहल से आंदोलनकारी किसान संतुष्ट नहीं है।
गुरुवार को फिर एक बार आंदोनकारी किसान सैकड़ों की संख्या में नवा रायपुर की सड़कों पर उतर गए। किसानों ने मंत्रालय पहुंच कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। किसान 27 गांवों के निवासी जहां बसे हैं वहां बसाहट का निश्शर्त पट्टा देने की मांग कर रहे हैं। किसानों की रैली के दौरान किसानों के मंत्रालय घेराव की सूचना को देखते हुए वहां पुलिस ने तगड़ी घेराबंदी कर रखी थी।
आंदोलनकारी किसानों ने गुरुवार को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें सभी 27 गांवों में पट्टा देने के साथ ही भूमिहीन सभी व्यस्क विवाहित हो या अविवाहित तीन जनवरी 2022 को 18 वर्ष आयु पूर्ण करते हो, उन्हें 1200 वर्ग फीट जमीन एक रुपये लीज रेट पर देने की मांग की है।
इधर, सरकार ने उनकी नौ में से छह मांगों मान ली है। इसमें प्रभावित किसानों को पात्रतानुसार 1,200 से 2,500 वर्गफीट आवासीय पट्टा देना भी शामिल है। साथ ही सिंचित और असिंचित जमीन के संबंध में पटवारी और वृक्षों के संबंध में वनपाल की रिपोर्ट को प्रमाण मानकर आपत्तियों का निराकरण करने का निर्णय लिया है।
इसी तरह सरकार ने नवा रायपुर में होने वाले टेंडर में 60 प्रतिशत कर्मचारी प्रभावित ग्राम से हो, यह शर्त जोड़ने की सहमति दे दी है। विभिन्न् सेक्टर्स में निर्मित 75 प्रतिशत दुकान, गुमटी चबूतरा और हाल का आवंटन लागत मूल्य पर आवेदन आमंत्रित कर लाटरी के माध्यम से परियोजना प्रभावित परिवारों को करने का फैसला किया गया है। लेयर-11 के गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री के लिए अनुमति की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।
13 गांवों में पट्टा वितरण के लिए तारीख तय
सात मार्च- कयाबांधा, 11 मार्च नवागांव (खपरी), 16 मार्च राखी, 22 मार्च झांझ, 25 मार्च खपरी, 31 मार्च कोटराभांठा, चार अप्रैल रीको, आठ अप्रैल चीचा, 13 अप्रैल सेंध, 19 अप्रैल छतौना, 25 अप्रैल नवागांव (खुटेरी), 29 अप्रैल तूता और चार मई उपरवारा।
समस्या के लिए कांग्रेस ने भाजपा को बताया जिम्मेदार
कांग्रेस ने नवा रायपुर के किसानों की समस्या के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सरकार को जिम्मेदार बताया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि 2006 और 2013 में प्रभावित किसानों के साथ किए गए वादे और 2006 तथा 2013 में आपसी सहमति से तय पुनर्वास योजना की शर्तों का पालन रमन सरकार ने अंत तक नहीं किया। इसी वजह से यह समस्या बनी हुई है।