आखिर क्यों शिव जी नहीं चढ़ती तुलसी और क्यों तीन बार दिया जाता है चरणामृत?

हर साल मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि इस साल 1 मार्च के दिन मनाई जाने वाली है और इस दिन शिव भक्त भोले बाबा को खुश करने के लिए उनकी पूजा करते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं वह पौराणिक कथा जिससे आपको पता चलेगा कि आखिर क्यों शिव जी को नहीं चढ़ती तुलसी?

आखिर क्यों शिव जी को नहीं चढ़ती तुसली- तुलसीजी भगवान शिवजी को इसलिए नहीं चढ़ाई जाती है, क्योंकि वह शापित है। कहा जाता है तुलसी का पूर्व जन्म में नाम वृंदा था। वह जालंधर नाम के एक राक्षस की पुत्री थी। वह राक्षस काफी जुल्म कर रहा था। वहीं जब जालंधर का शंकरजी से युद्ध हुआ तो वह उनसे भी नहीं हार रहा था। तब शिवजी ने भगवान विष्णु से आग्रह किया। विष्णुजी ने छल से वृंदा का पतिव्रत धर्म भंग कर दिया। उसके बाद में जब वृंदा को यह पता चला कि वे भगवान विष्णु थे, तो उन्होंने विष्णुजी को श्राप दे दिया कि आप पत्थर बन जाओ। उसके बाद विष्णु ने कहा कि हम तुम्हारा जालंधर से बचाव कर रहे थे, अब मैं तुम्हे श्राप देता हूं कि तुम लकड़ी हो जाओ। वहीं इस श्राप के बाद वृंदा कालांतर में तुलसी का पौधा बन गईं।

चरणामृत तीन बार ही क्यों देते हैं-  आपको बता दें कि दुनिया में तीन प्रकार के दुख होते हैं। पहला अधिभौतिक, दूसरा अधिदैिवक और तीसरा आध्यात्मिक। आपको बता दें कि अधिभौतिक के अंतर्गत मनुष्य के शरीर में विभिन्न तरह के विकार या बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। वहीं अधिदैविक में देवता द्वारा कष्ट दिए जाते हैं। जैसे- ओलावष्टि, दुर्घटना, अतिवृष्टि और अनावृष्टि, भूकंप, बिजली गिरना। इसी के साथ तीसरा, आध्यात्मिक यानी मन और बुद्धि काम न करे। ऐसे में चरणामृत के आचमन से तीनों तरह के दुखों का शमन हो जाता है।

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