चार दिवसीय गायत्री महायज्ञ संम्पन्न, 550 दीप जलाकर मंत्रोचारण से दी पूर्णाहुति

कुम्हारी। गायत्री प्रज्ञा पीठ कुम्हारी में चार दिवसीय गायत्री महायज्ञ, प्रज्ञा पुराण तथा दीप महायज्ञ के आयोजन के तहत शुक्रवार को टोली नायक पंडित चेलादास वैष्णव के द्वारा यज्ञ की महिमा व यज्ञ में प्रयुक्त सामग्री की विवेचना करते हुए पांचों उंगलियों के बारे में विस्तार से चर्चा किया गया । दो पालियों में यज्ञ के लगभग 200 लोगों ने भाग लिया। दोपहर दूसरी पाली में जीवन मे अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सूर्य भगवान की अनियमितता को किस प्रकार अनुशासित किया जाने पर प्रकाश डाला ततपश्चात दीप यज्ञ का प्रारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में नारायण प्रसाद वर्मा अध्यक्ष ऋतंभरा साहित्य समिति अवधेश दुबे, रामाधार शर्मा एवं भिलाई शक्तिपीठ के समंवयक मेघ वर्मा रामलाल वर्मा लिमतरा ने गायत्री मंत्र के आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। दीप यज्ञ प्रांगण में 550 दीप जलाकर रोशनी कर मंत्रों से आहुति दी गई। वही शनिवार को प्रातः कालीन यज्ञ में करीब 600 लोग शामिल हुए। यज्ञ के साथ संस्कार की कड़ी में 19 विद्यारंभ संस्कार, चार मुंडन संस्कार , यग्योपवित संस्कार एवं जन्मदिवस संस्कार वैदिक मंत्रों के साथ संम्पन्न कराया गया।
कार्यक्रम के समापन के लिए वासुदेव शर्मा संचालक देव संस्कृत विद्यालय सांकरा (कुम्हारी) ने अपने उद्बोधन में जीवन मे साधना उपासना एवं आराधना पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि मानव जीवन को जनकल्याणकारी कार्यों में संलग्न करना चाहिए

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