भगवान जगन्नाथ स्वामी की जयकारा से गुंज रहा है शबरी धाम

शिवरीनारायण — छत्तीसगढ़ की प्रमुख तीर्थ शिवरीनारायण महानदी ,जोक एवं शिवनाथ नदी का संगम स्थल तथा भगवान जगन्नाथ स्वामी का मूल स्थान होने के कारण इस धीर्मिक नगर को प्रयागराज और जगन्नाथपुरी दोनो तीर्थों का दर्जा प्राप्त है इसलिए प्रति वर्ष माघ पूर्णिमा के दिन श्रध्दालु शिवरीनारायण महानदी त्रिववेणी संगम में स्नान कर भगवान जगन्नाथ स्वामी स्वरूप भगवान श्री शिवरीनारायण का दर्शन कर दोनो तीर्थो का पूण्य प्राप्त करते हैं इस वर्ष भी हजारो श्रध्दालु संगम में पुन्नी स्नान कर भगवान शिवरीनीरायण का दर्शन किया । आज सुबह 4 बजे श्री शिवरीनारायण भगवान के पूजन,और स्तुति के बाद मंदिर का मुख्य पट(दरवाजा) खोला गया।मुख्य दरवाजा खोलते ही श्रद्धालुओं ने श्री शिवरीनारायण भगवान की जय,जगन्नाथ स्वामी की जय,शबरी माता की जय की जयकार और जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए आतुर नजर आए सुबह 3 बजे से ही दर्शन हेतु मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गयी थी। श्री शिवरीनारायण भगवान मन्दिर(बड़ा मंदिर) श्री केशवनारायण भगवान मंदिर,शबरी मंदिर,परिसर को फूलों और विधुत झालरों से आकर्षक सजावट किया गया है ।

श्रघ्दालुओं ने किया माघी पूर्णिमा स्नान-

शिवरीनारायण के ऐतिहासिक और पौराणिक माघी पूर्णिमा मेले में नगर की जीवनदायिनी नदी चित्रोत्पला गंगा महानदी के त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के साथ ही देश के विभिन्न अखाड़ों के साधु संत,नागा बाबा,हठ योगी बाबा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बिहार, उड़ीसा के श्रद्धालुओं का जत्था बड़ी संख्या में शबरी धाम पहुँचे हुए थे।जहां सभी श्रद्धालुओं ने चित्रोत्पला गंगा महानदी में आस्था की पवित्र डुबकी लगाई।

झाँकी बना आकर्षण का केंद्रबिंदु–

श्री शिवरीनारायण भगवान मंदिर परिसर में भगवान के विभिन्न रूपों की पहली बार झाँकी लगाई गई है जिसमें श्री कृष्ण जी ने गोवर्द्धन पर्वत अपनी ऊँगली पर उठाए हुए हैं इसी तरह
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी को माता शबरी जूठे बेर खिला रही प्रतिमा को श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन पूजन कर रहे हैं। जमीन पर लौट मारने की परंपरा कायम रही—शिवरीनारायण माघी पूर्णिमा मेले के तीन चार दिनों पहले से ही जमीन पर लौट मारते हुए श्रद्धालुओं की टोली बड़ी संख्या में शिवरीनारायण पहुँच रहे हैं । धार्मिक मान्यता है की जमीन पर लौट मारने से श्री शिवरीनारायण भगवान शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं इसीलिए प्रतिवर्ष दुर दूर से श्रद्धालु जमीन पर लोट मारते हुए शबरी धाम पहुँचते है। नगर के श्रद्धालुओं ने भी अपने अपने घरों से जमीन पर लौट मारते हुए श्री शिवरीनारायण भगवान मंदिर का परिक्रमा किया,छोटे छोटे बच्चों के साथ महिलाओं, पुरुष,बूढे, युवा तथा स्कूली बच्चों ने भी मंदिर का लौट मारकर परिक्रमा किया।

साधु संतों ने किया शाही स्नान-

श्री शिवरीनारायण भगवान मठ मंदिर के राजेश्री महंत रामसुंदर दास जी महाराज के अगुवाई में साधु संतों, गणमान्य नागरिकों ने कीर्तन मंडली, ढोल ताशों के साथ
मठ मंदिर से महानदी में शाही स्नान के लिए शोभायात्रा निकाली गई।साधु संतों की टोली ने शौर्य प्रदर्शन के साथ शोभायात्रा में आगे आगे चल रहे थे नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए शोभायात्रा बाबा घाट पहुँचा जहाँ शाही स्नान का कार्यक्रम संपन्न हुआ शाही स्नान के बाद शोभायात्रा बाजे गाजे के साथ वापस मठ मंदिर आया।

श्री शिवरीनारायण भगवान मंदिर में ध्वज फहराया—श्री

शिवरीनारायण भगवान मंदिर के पुजारी पंडित हरीश तिवारी ने माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंदिर के स्वर्ण कलश पर सर्वप्रथम ध्वज चढ़ाया । धार्मिक परम्परा के अनुसार माघ पूर्णिमा के अवसर पर सबसे पहले मुख्य मंदिर के पुजारी पंडित हरीश तिवारी भोगहा के द्वारा मन्दिर के गर्भगृह में भगवान श्री शिवरीनारायण के समीप ध्वज को चौकी पर रखकर ध्वज का मन्त्रोच्चारण कर विधिवत पूजन किया। ध्वज को श्री शिवरीनारायण भगवान के स्वर्ण कलश के शिखर पर कमल यादव के द्वारा चढ़ाया गया इसके बाद श्रद्धालुओं के द्वारा मंदिर कलश के शिखर पर ध्वजा चढ़ाया गया।माघ पूर्णिमा को दिनभर हजारो श्रद्धालुओं ने श्री शिवरीनारायण भगवान मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाया।

श्रध्दालुओं ने सत्यनारायण कथा का श्रवण किया —

श्री शिवरीनारायण भगवान मन्दिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्री सत्यनारायण भगवान की अमृत कथा का रसपान किया।श्री शिवरीनारायण भगवान मंदिर परिसर और महानदी के किनारे छोटे छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया गया।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *