श्याम वर्मा वरिष्ठ उदघोषक आकाशवाणी रायपुर एक परिचय

तिल्दा नेवरा, तिल्दा ब्लॉक के ग्राम ताराशिव , में श्याम वर्मा का जन्म दिन शनिवार 29-5-1963 को हुआ। उनकी शिक्षा गांव के प्राथमिक शाला ताराशिव, मिडिल और हाईस्कूल में छ्तौद में भी शिक्षा प्राप्त की उनके पिताजी  जगत राम वर्मा कॄषक और व्यवसायी थे। घर मे बड़े भाई  प्रेम लाल वर्मा वड़ोदरा गुजरात घराने के संगीत साधक के रूप मे जाने जाते थे, जिसका प्रभाव आप पर भी पड़ा, हारमोनियम के साथ भजन, ग़ज़ल गायक के रूप मे अंचल मे आपको भी कलाकार के रूप मे लोग जानते थे।
सेंचुरी सिमेंट के सन् राइज़ आक्रेसटा मे आप उदघोषक भी रहे, फ़िर सन् 1987 मे आकाशवाणी रायपुर के श्रमिक जगत, और चौपाल मे कम्पीयर , सन् 1988 मे नैमेतिक उदघोषक रहे।
सन् 1988 से आपने दूरदर्शन केन्द्र रायपुर मे साप्ताहिक कार्यक्रम “नवरंग “में बतौर उदघोषक रहे , फिर दूरदर्शन के “भुइंया के गोठ”का पहला उदघोषक के तौर पर सन् 1996 तक कार्यक्रम की निरंतर प्रस्तुतियां दी।
आकाशवाणी शहडोल मध्य प्रदेश में उदघोषक के लिए1992 में साक्षात्कार तक पहुंचने के बाद सफलता नहीं मिली और सन् 1995 मे सफलता मिली और अपने सन् 1996 मे नियमित उदघोषक के रूप मेऔर सन् 1999 मे आपका तबादला रायपुर हो गया।
ग्रामीण परिवेश से होने के कारण आपका आचार विचार तथा संस्कार भी उच्च आदर्शों के साथ है।यही कारण है कि आप श्रोताओं को भरपूर प्यार सम्मान देते हैं, जिसका परिणाम है श्रोता भी आपको भरपूर प्यार और सम्मान देते हैं। लोकसंगीत के कलाकार भी आपको भरपूर प्यार देते है।
मोर भूइंयां के माध्यम से आपको प्रदेश भर मे जाने जाते हैं, आकाशवाणी रायपुर के “आप मन के गीत”,सुर सिंगार, चौपाल, गांधी चर्चा, प्रगति के सोपान,नवा बिहान, अजी सुनिए, राजनेताओं के कार्यक्रम को नगर दर्पण के रूप मे प्रस्तुत करना और आकाशवाणी रायपुर के सबसे ज़्यादा कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्त

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