सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैजैपुर विवादों में डॉक्टर का फर्जी हस्ताक्षर का मामला

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैजैपुर में सीमा श्रीकांत ग्राम पेंड्री विकासखंड नवागढ़ जो कोविड-19 जाँच के लिए 15 जनवरी 22 को आई थी जिसका कोविड 19 पॉजिटिव पाया गया जहां पर स्वास्थ्य केंद्र के ओपीडी की पर्ची में एक ही व्यक्तियों के हस्ताक्षर देखने को मिल रहा है। जिसमें ग्राम पेंड्री विकासखंड नवागढ़ में पंचों के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव सीमा श्रीकांत पर लाया गया था लेकिन कोविड 19 होने के वजह से अविश्वास प्रस्ताव को स्थगित किया गया। देखने वाली बात यह है कि सरपंच सीमा श्रीकांत का कोविड-19 पाया गया लेकिन इसमें यह देखने को मिल रहा है कि लैब टेक्नीशियन इंद्रेश कुरैशी ने अपना हस्ताक्षर स्वीकार किया वहीं पर मेडिकल ऑफिसर जैजैपुर का जो सील लगा है वहां पर डॉ उमाशंकर साहू ने अपने हस्ताक्षर को नकार दिया। उन्होंने साफ बताया कि जहां पर डॉक्टर लिखा जाता है वहां पर मेरे द्वारा हस्ताक्षर करना रहता है लेकिन वहां पर जो सील के ऊपर में मेरा हस्ताक्षर किया गया है वह फर्जी है लेकिन इस हस्ताक्षर को किसने किया है मैं नहीं जानता 15 जनवरी 2022 को मैं ड्यूटी में जरूर था लेकिन मैंने कोविड-19 के पंजी मैं हस्ताक्षर नहीं किया है ।जब सीमा श्रीकांत से मोबाइल से संपर्क करना हमारे संवाददाता ने चाहा तो सीमा श्रीकांत मोबाइल को रिसीव करना उचित नहीं समझी।

एक ही व्यक्ति द्वारा ओपीडी पर्ची में लिखावट

यदि जांच किया जाए ओपीडी पर्ची जैजैपुर का तो उसमें एक ही व्यक्ति के द्वारा लिखा होना महसूस हो रहा है जहां पर लैब टेक्नीशियन इंद्रेश कुरैशी ने कहा है कि मैंने तो इसमें हस्ताक्षर किया है लेकिन किस डॉक्टर से वहा हस्ताक्षर आई है उसके बारे में मैं नहीं जानता

डॉक्टर ने हस्ताक्षर से किया इनकार

डॉ उमाशंकर साहू से जब हमारे संवाददाता ने हस्ताक्षर के बारे में जानकारी चाहा तो उन्होंने कहा कि मैंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी पर्ची में हस्ताक्षर उस रोज नहीं किया हूं कौन मेरे हस्ताक्षर का उपयोग किया है मैं वह नहीं जानता क्योंकि मेरा हस्ताक्षर इस तरह से नहीं बनता है

लैब टेक्नीशियन ने अपना हस्ताक्षर होना कबूल किया

जहां पर कुरैशी से जब जानकारी लेना हमारे संवाददाता ने चाहा तो उन्होंने कहा कि यह हस्ताक्षर मेरा है लेकिन कि डॉक्टर से सीमा श्रीकांत ने हस्ताक्षर करवाया है वह मैं नहीं बता सकता

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर का स्टांप कौन लगाया

मजेदार बात यह है कि ओपीडी पर्ची जैजैपुर में स्वास्थ्य विभाग के ही कर्मचारी के द्वारा ही मेडिकल ऑफिसर का सील लगाया जाता है तो ऐसा अनुमान लगता है कि एक ही व्यक्ति के द्वारा पूरे पर्ची का निर्माण किया गया है और संदेह इसमें यह जाता है कि कुरैशी के द्वारा ही यह कूट रचना किया होगा जिसके वजह से डॉक्टर का उन्होंने हस्ताक्षर किया होगा लेकिन डॉक्टर ने भी साफ इनकार किया है कि जो मेरा हस्ताक्षर है वह नहीं है यदि लैब टेक्नीशियन मेरे पास हस्ताक्षर कराने आते तो मैं पहला उनका हस्ताक्षर देखता हूं उसके बाद मैं अपना हस्ताक्षर करता हूं लेकिन उस दिन ऐसी घटना मेरे साथ नहीं हुई है लेकिन मैं कार्यालय में उपस्थित रहा लेकिन हस्ताक्षर मैंने नहीं किया ।
हस्ताक्षर का जांच स्पेशलिस्ट से किया जाए
अब मजेदार बात यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी विवादों में दिखाई देते हुए नजर आ रहे हैं जहां पर यह देखा जाए कि मूल प्रति में जो हस्ताक्षर किए हैं उसमें किन-किन कलम का उपयोग किया गया है। यदि अनेक कलम का उपयोग किया जाता है तो नजारा कुछ और भी आ सकती है जहां पर यह अनुमान लगाया जाता है कि लैब टेक्नीशियन के द्वारा ही यह कदम को उठाया
गया होगा।

सरपंच से जब हमारे संवाददाता ने संपर्क करना चाहा तो सीमा श्रीकांत ने मोबाइल रिसीव करना उचित नहीं समझा इससे यह और पेचीदा मामला दिखाई दे रहा है। जहां पर लैब टेक्नीशियन कुरेशी ने कहा कि यह कारनामा जो यहां पर पर्ची बनवाने आई थी उन्हीं के द्वारा किसी से कराया गया होगा लेकिन अब जांच एक्सपर्ट इस हस्ताक्षर का खुलासा कर पाएंगे कि यह उमाशंकर साहू का हस्ताक्षर किसने किया इससे दूध का दूध और पानी का पानी साफ नजर आएगा इसे साफ यह जाहिर होता है कि दिनांक 7 जनवरी 22 को एक नवजात शिशु की भी लाश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सेफ्टी टैंक के ऊपर पत्थर में पाई गई थी इससे यह जाहिर हो रहा है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की ही यह खेल दिखाई पड़ रहा है जो घटना 15 जनवरी 22 को पुनरावृति की ओर अग्रसर हो कर फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया है। लैब टेक्नीशियन कुरैशी पर ही संदेह को जन्म दे रहा है क्योंकि पहले कोविड-19 की जांच वही करा कर डॉक्टर के पास हस्ताक्षर करवाते हैं अब हस्ताक्षर स्पेशलिस्ट ही खुलासा कर पाएंगे कि यह हस्ताक्षर डॉ उमाशंकर साहू का है या किसी और के द्वारा उसे फंसाने के लिए हस्ताक्षर किया गया है उनके पश्चात ही एफ आई आर का प्रकरण दर्ज हो सकता है इस तरह से कोविड-19 प्रमाण पत्र पेश करने के बाद सीमा श्रीकांत अविश्वास प्रस्ताव से बच गई है लेकिन उसके ऊपर भी खतरा मंडराता हुआ नजर आ रहा है।

 

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