रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोयला पर राज्यों को अभी मिल रही 14 फीसद रायल्टी को दो फीसद बढ़ाने का आग्रह किया है। केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ शुक्रवार वर्चुअल में बघेल ने राज्य के हितों पर मजबूती से रखा पक्ष। रायल्टी दर को 16 फीसद करने का आग्रह करते हुए बघेल ने बेसिक सेल प्राईज हर तीन महीने में घोषित करने की मांग की। यह बेसिक प्राईज कोल इंडिया घोषित करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को रायल्टी से संबंधित विषय को समग्र रूप से देखने की आवश्यकता है। कोल उत्पादक राज्यों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कोल रायल्टी की दरों में बढ़ोतरी करने और खदानों से लौह अयस्क के रन आफ माइन्स (आरओएम) की रायल्टी दरों को नोटिफाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खदानों में जानबूझकर बड़ी मात्रा में फाइंस लौह अयस्क का उत्पादन किया जाता है। लंप (बारीक) और फाइंस की रायल्टी में बड़ा अंतर होने के कारण राज्य सरकार को रायल्टी में बड़ी क्षति होती है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से राज्य के हिस्से की कोल ब्लाकों पर लगाई गई अतिरिक्त लेवी की राशि 4169.86 करोड़ जल्द उपलब्ध कराने का आग्रह किया। बैठक में प्रमुख सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ, खनिज साधन विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी और संचालक खनिज साधन जयप्रकाश मौर्य उपस्थित थे।
पेट्रोल-डीजल की कीमत रोज बढ़ रही है तो कोयला की क्यों नहीं
मुख्यमंत्री ने जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि इस वर्ष जून के बाद नहीं मिलेगी। इससे प्रदेश को पांच हजार करोड़ का नुकसान होगा। बघेल ने क्षतिपूर्ति को अगले पांच वर्ष तक जारी रखने की मांग करते हुए कहा कि कहा कि जब पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोज बढ़ रही हैं तब कोल की रायल्टी क्यों नहीं बढ़ सकती। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खदानों के साथ उद्योग भी हैं, लेकिन राज्य न माइंस से और न ही उद्योगों से फायदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि खदानों के लिए हमारे जंगल और जमीन जाती है और बदले में केवल प्रदूषण बढ़ता है। ऐसे में यह नीति औद्योगिकरण को हतोत्साहित करने वाली साबित हो रही है।