Bali Yatra 2026 | ओडिशा की ऐतिहासिक और प्रसिद्ध बाली यात्रा को इस साल पर्यावरण के अनुकूल बनाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने कटक में आयोजित होने वाले इस आठ दिवसीय महोत्सव को प्लास्टिक-मुक्त बनाने का फैसला लिया है। यह आयोजन 24 नवंबर से 1 दिसंबर 2026 तक चलेगा। महोत्सव में ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और प्राचीन कलिंग-बाली के ऐतिहासिक संबंधों की झलक देखने को मिलेगी।
मंत्री सूर्यवंशी सूरज की अध्यक्षता में हुई बैठक
बाली यात्रा की तैयारियों को लेकर बुधवार, 4 नवंबर को ओडिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें महोत्सव को बेहतर ढंग से आयोजित करने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इंतजामों पर चर्चा की गई।
सरकार का उद्देश्य इस बार बाली यात्रा को प्लास्टिक-मुक्त बनाने के साथ-साथ इसे सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।
500 स्टॉल पर दिखेंगे ओडिशा के पारंपरिक उत्पाद
इस साल मेले में ओडिशा रूरल डेवलपमेंट एंड मार्केटिंग सोसाइटी (ORMAS) की ओर से करीब 500 स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें राज्य के हथकरघा, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इससे स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलेगा। महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए दो विशेष मंच भी तैयार किए जाएंगे।
बाली और प्राचीन कलिंग के रिश्तों की दिखेगी झलक
इस बार बाली यात्रा का प्रमुख आकर्षण ‘कटक-इन-कटक’ (Cuttack-in-Cuttack) विशेष पवेलियन होगा। यहां प्राचीन कलिंग और इंडोनेशिया के बाली द्वीप के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इसमें दोनों क्षेत्रों की भाषा, खानपान, पहनावे और पारंपरिक पांडुलिपियों की समानताओं को दिखाया जाएगा। ओडिशा की ताड़पत्र पांडुलिपियों और बाली की पारंपरिक लोंतार पांडुलिपियों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा, ऐतिहासिक संबंधों की जानकारी देने के लिए एक डिजिटल इंफॉर्मेशन वॉल भी स्थापित की जाएगी। इस साल बाली से एक प्रतिनिधिमंडल के भी महोत्सव में शामिल होने की उम्मीद है।
24 नवंबर से शुरू होगा आठ दिवसीय महोत्सव
बाली यात्रा ओडिशा के सबसे बड़े सांस्कृतिक और व्यापारिक आयोजनों में से एक है। यह महोत्सव महानदी के तट पर कटक में आयोजित किया जाता है। इसमें हर साल बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
यह आयोजन प्राचीन कलिंग के उन समुद्री व्यापारिक संबंधों की याद दिलाता है, जिनके जरिए ओडिशा के नाविक दक्षिण-पूर्व एशिया और बाली तक समुद्री यात्राएं करते थे।
इस साल भी मेले में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पारंपरिक उत्पादों और ऐतिहासिक प्रदर्शनियों के जरिए ओडिशा की विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, बाली यात्रा 2026 में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन और ओडिशा की समुद्री विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर विशेष जोर रहेगा।