विशाखापत्तनम में RINL की जमीनों की ई-नीलामी का दूसरा चरण पूरा, 114 भूखंडों से मिले 218 करोड़ रुपये

नई दिल्ली । राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC) ने विशाखापत्तनम स्थित राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) की अधिशेष भूमि के ई-नीलामी अभियान का दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस चरण में 114 भूखंडों की सफलतापूर्वक नीलामी हुई, जिससे कुल 218 करोड़ रुपये की बोली प्राप्त हुई। इन भूखंडों का कुल आरक्षित मूल्य 184.81 करोड़ रुपये था। इस तरह सफल बोलियां आरक्षित मूल्य से 17.96 प्रतिशत अधिक रहीं।

वित्त मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि यह ई-नीलामी 3 नवंबर को विशाखापत्तनम में आयोजित की गई थी। इस प्रक्रिया के जरिए सरकारी परिसंपत्तियों के पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से मौद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है।

दो चरणों में 584.33 करोड़ रुपये की बोलियां

RINL की भूमि की ई-नीलामी के दोनों चरणों को मिलाकर अब तक कुल 264 भूखंडों की सफलतापूर्वक बिक्री हुई है। इनसे कुल 584.33 करोड़ रुपये की सफल बोलियां प्राप्त हुई हैं, जबकि इन भूखंडों का संयुक्त आरक्षित मूल्य 497.29 करोड़ रुपये था। इस प्रकार दोनों चरणों में आरक्षित मूल्य से 17.50 प्रतिशत अधिक राशि प्राप्त हुई।

पहले चरण में 12 अक्टूबर 2026 को 150 भूखंडों की नीलामी की गई थी। इससे 312.48 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य के मुकाबले 366.33 करोड़ रुपये की सफल बोलियां मिली थीं। पहले चरण में आरक्षित मूल्य से 17.23 प्रतिशत अधिक कीमत प्राप्त हुई थी।

दूसरे चरण में 1.82 लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक लगी बोली

दूसरे चरण की नीलामी में सबसे ऊंची सफल बोली 1,82,650 रुपये प्रति वर्ग गज दर्ज की गई। वहीं, किसी एक भूखंड के आरक्षित मूल्य के मुकाबले सबसे अधिक प्रीमियम 67.65 प्रतिशत रहा।

इन आंकड़ों से विशाखापत्तनम में स्थित भूखंडों के प्रति निवेशकों की रुचि और प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी प्रक्रिया के जरिए संपत्तियों के मूल्य निर्धारण की स्थिति सामने आई है।

NLMC की पहली एंड-टू-एंड ई-नीलामी पहल

राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम की यह पहली ऐसी ई-नीलामी पहल है, जिसमें परिसंपत्तियों की तैयारी से लेकर ऑनलाइन प्रतिस्पर्धात्मक बोली तक पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया।

इसमें भूमि परिसंपत्तियों की पहचान और तैयारी, लेनदेन की संरचना, निवेशकों तक जानकारी पहुंचाना, बोलीदाताओं को सहायता देना और ऑनलाइन नीलामी जैसी प्रक्रियाएं शामिल रहीं।

दोनों चरणों की नीलामी एक महीने से भी कम समय में पूरी होने से NLMC की अन्य सरकारी संस्थानों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की अधिशेष भूमि एवं भवन परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण की क्षमता को भी मजबूती मिली है।

बची हुई जमीनों की जल्द होगी तीसरे चरण में नीलामी

दो चरणों की सफलता के बाद NLMC अब शेष बिना बिके भूखंडों की नीलामी के लिए तीसरा चरण आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, यह प्रक्रिया संबंधित मंजूरियों और निर्धारित शर्तों के अधीन होगी। तीसरे चरण की तारीख और अन्य विवरण बाद में घोषित किए जाएंगे।

क्या है राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम?

राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC) वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है।

इसका प्रमुख उद्देश्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सरकारी संस्थाओं के पास उपलब्ध अधिशेष भूमि एवं भवन परिसंपत्तियों की पहचान, मूल्यांकन और पारदर्शी तरीके से बिक्री या मौद्रीकरण करना है।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी सार्वजनिक परिसंपत्तियों के आर्थिक मूल्य का उपयोग करना और उन्हें उत्पादक गतिविधियों से जोड़ना है।

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