पेरिस । दुनिया भर में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकारों की हत्या के मामलों में दोषियों को सजा नहीं मिलने की वैश्विक दर बढ़कर 86 प्रतिशत तक पहुंच गई है। रिपोर्ट में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और न्याय मिलने में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई गई है।
यूनेस्को ने यह रिपोर्ट 2 नवंबर को मनाए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय दिवस : पत्रकारों के खिलाफ अपराधों में दंडमुक्ति समाप्त करने’ के अवसर पर जारी की। रिपोर्ट का शीर्षक ‘सेफ्टी ऑफ जर्नलिस्ट्स एंड द डेंजर ऑफ इम्युनिटी’ है।
पत्रकारों के खिलाफ अपराधों में बढ़ रही दंडमुक्ति
यूनेस्को की रिपोर्ट में बताया गया है कि पत्रकारों की हत्या के मामलों में दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बड़ी संख्या में मामलों में आरोपियों को सजा नहीं मिल पाती, जिससे पत्रकारों के खिलाफ अपराध करने वालों में दंड का भय कमजोर पड़ने की आशंका रहती है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-2025 के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े हालात विशेष चिंता का विषय रहे हैं।
ड्रोन हमलों का भी बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट में पत्रकारों के खिलाफ ड्रोन हमलों की बढ़ती घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से पत्रकारों के सामने सुरक्षा संबंधी नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए यह खतरा और गंभीर हो सकता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
पत्रकारों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की जरूरत
यूनेस्को ने पत्रकारों के खिलाफ होने वाले अपराधों की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
रिपोर्ट का मुख्य संदेश है कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल मीडिया जगत का मुद्दा नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से भी जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
पत्रकारों के खिलाफ अपराधों में दंडमुक्ति समाप्त करने और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सरकारों, न्यायिक संस्थाओं तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच प्रभावी सहयोग जरूरी है।