मुंबई । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की कूटनीतिक कोशिशों के बीच भारतीय रुपये को कुछ राहत मिली है। गुरुवार को अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.50 पैसे मजबूत होकर 95.2650 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय मुद्रा 95.28 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल और विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ने वाले दबाव में कमी आने की उम्मीद ने रुपये को सहारा दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के मानक ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ने की संभावनाओं से तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं कुछ कम हुईं।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है। इसके विपरीत कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रुपये के लिए राहत का कारण बनती है।
डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेश पर भी नजर
हालांकि रुपये की स्थिति पूरी तरह मजबूत नहीं कही जा सकती। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेत भारतीय मुद्रा की चाल को प्रभावित कर रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बनी हुई है।
आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल?
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर इंडेक्स और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो भारतीय मुद्रा को आगे भी कुछ समर्थन मिल सकता है।
हालांकि मजबूत डॉलर और विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ती मांग रुपये के लिए चुनौती बनी रह सकती है।