रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान जनजातीय नेता, प्रख्यात अभियंता एवं पूर्व सांसद बाबा कार्तिक उरांव की जन्मशताब्दी के अवसर पर उनकी आदमकद प्रतिमा का वर्चुअल माध्यम से अनावरण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, डिगमा, अंबिकापुर का नाम बदलकर ‘अभियंता बाबा कार्तिक उरांव छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अंबिकापुर’ करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का संपूर्ण जीवन शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, संगठन और जनजातीय समाज के स्वाभिमान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए जनजातीय समाज को विकास और प्रगति की राह दिखाई। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।
इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम बाबा कार्तिक उरांव के नाम पर होगा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज और क्षेत्रीय सांसद की मांग पर राज्य सरकार ने शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, डिगमा का नाम बाबा कार्तिक उरांव के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि एक प्रतिभाशाली अभियंता के नाम पर तकनीकी शिक्षण संस्थान का नामकरण नई पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
सीतापुर को 28 करोड़ की फोरलेन सड़क की सौगात
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सीतापुर क्षेत्र में सोनतराई से सूर तक लगभग 3.82 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इस परियोजना पर 28 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। सड़क निर्माण से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
पुलिस आवासीय भवनों का लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा निर्मित महिला एनजीओ मेस भवन, उदयपुर में 12 अराजपत्रित अधिकारी आवास, 12 प्रधान आरक्षक एवं आरक्षक आवास तथा थाना सीतापुर में 12 प्रधान आरक्षक एवं आरक्षक आवासीय भवनों का लोकार्पण किया।
उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों और जवानों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इन भवनों से पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को सुविधाजनक आवासीय वातावरण मिलेगा।
जनजातीय समाज के अधिकारों की आवाज बने थे बाबा कार्तिक उरांव
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने उच्च शिक्षा और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय देकर पूरे जनजातीय समाज का गौरव बढ़ाया। उन्होंने लोकसभा सांसद के रूप में जनजातीय समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक हितों और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावशाली ढंग से उठाया।
उन्होंने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव की विरासत को सहेजना और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार जनजातीय महापुरुषों के योगदान और स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
नक्सलवाद के विरुद्ध सफलता से बस्तर में विकास की नई राह
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलता से बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है। अब दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्य सरकार कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, रोजगार और जनजातीय विकास के माध्यम से प्रदेश को समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
कई जनप्रतिनिधि रहे उपस्थित
कार्यक्रम में जनजातीय विकास मंत्री रामविचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक उद्धेश्वरी पैकरा, विधायक रामकुमार टोप्पो, अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
सांसद चिंतामणि महाराज ने बाबा कार्तिक उरांव की प्रतिमा के अनावरण और इंजीनियरिंग महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।