तिल्दा-नेवरा। नहर विभाग द्वारा नहर किनारे लगे वृक्षों की कथित अंधाधुंध कटाई और काटी गई लकड़ी के निस्तारण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि कटाई के बाद लकड़ी विभाग की निर्धारित व्यवस्था तक पहुंचने के बजाय सीधे ठेकेदार के घर ले जाई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को नुकसान की आशंका
नहर किनारे लगे पुराने वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, पक्षियों को आश्रय देने और आसपास के वातावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई से स्थानीय हरियाली और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि वृक्षों की कटाई किस आधार पर की जा रही है और क्या इसके लिए आवश्यक विभागीय अनुमति ली गई है। यदि नहर की मरम्मत, सुरक्षा या रखरखाव के लिए वृक्षों को हटाना जरूरी है, तो कटाई निर्धारित नियमों और आवश्यकता के अनुरूप होनी चाहिए।
लकड़ी के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू काटे गए वृक्षों की लकड़ी के परिवहन और निस्तारण से जुड़ा है। आरोप है कि लकड़ी को विभागीय संग्रहण स्थल पर ले जाने के बजाय सीधे ठेकेदार के घर पहुंचाया जा रहा है।
यदि लकड़ी सरकारी संपत्ति के अंतर्गत आती है, तो उसकी मात्रा, परिवहन, भंडारण और निस्तारण का विधिवत रिकॉर्ड होना आवश्यक है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने वृक्ष काटे गए, उनसे कितनी लकड़ी प्राप्त हुई, उसका मूल्यांकन कैसे किया गया और उसके निस्तारण के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई।
इन तथ्यों की पुष्टि के लिए विभागीय दस्तावेजों, परिवहन रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के अभिलेखों की जांच जरूरी है।
अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
लकड़ी सीधे ठेकेदार के घर पहुंचने के आरोपों के बाद विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह स्पष्ट होना चाहिए कि कटाई की अनुमति किस अधिकारी ने दी, कार्य की निगरानी कौन कर रहा है और लकड़ी के परिवहन तथा निस्तारण का हिसाब किस स्तर पर रखा जा रहा है।
हालांकि, किसी अधिकारी या ठेकेदार की मिलीभगत अथवा राजस्व नुकसान की पुष्टि बिना जांच के नहीं की जा सकती। इसलिए मामले से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों का निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है।
वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराने की मांग
मामले में संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की जा रही है। जांच के दौरान निम्न बिंदुओं को शामिल करने की आवश्यकता है:
- वृक्षों की कटाई के आदेश और आवश्यक अनुमतियों की जांच।
- काटे गए वृक्षों की संख्या और प्राप्त लकड़ी की मात्रा का सत्यापन।
- लकड़ी के परिवहन, भंडारण और निस्तारण से संबंधित रिकॉर्ड की जांच।
- ठेकेदार के घर लकड़ी पहुंचने के आरोप की पुष्टि।
- लकड़ी के मूल्यांकन और शासन को प्राप्त राजस्व का मिलान।
- अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई।
पर्यावरण संरक्षण के साथ पारदर्शिता भी जरूरी
वृक्षों की कटाई यदि किसी तकनीकी या सुरक्षा संबंधी आवश्यकता के कारण की जा रही है, तो विभाग को उसका आधार स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही, अनावश्यक कटाई रोकने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
अब मुख्य सवाल यह है कि नहर किनारे काटे गए वृक्षों की लकड़ी का पूरा हिसाब विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं। संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। निष्पक्ष जांच से न केवल लकड़ी के निस्तारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संपत्ति की जवाबदेही से जुड़े सवालों का भी समाधान हो सकेगा।