नई दिल्ली । देश में विमान रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एयर इंडिया ने बड़ा कदम उठाया है। टाटा समूह की विमानन कंपनी ने शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अत्याधुनिक एमआरओ संयंत्र की आधारशिला रखी। इस सुविधा से एयरलाइन की रखरखाव लागत कम करने और भारत को वैश्विक विमानन सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित एमआरओ हैंगर का निर्माण नौ एकड़ क्षेत्र में किया जाएगा। यहां एक वाइडबॉडी और एक नैरोबॉडी विमान को एक साथ खड़ा करने की सुविधा होगी, जिससे दोनों श्रेणियों के विमानों का रखरखाव और ओवरहॉलिंग एक ही समय पर की जा सकेगी।
एक साथ दो विमानों के रखरखाव की सुविधा
दिल्ली में बनने वाला यह एमआरओ केंद्र आधुनिक विमानन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इसमें बड़े आकार के वाइडबॉडी विमान और अपेक्षाकृत छोटे नैरोबॉडी विमान की एक साथ सर्विसिंग की जा सकेगी।
इस तरह की सुविधा से विमानों के रखरखाव की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनाने और समय की बचत करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही, एयर इंडिया को अपने विमानों के रखरखाव के लिए विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता कम करने का अवसर मिलेगा।
एयरलाइन की लागत घटाने में मिलेगी मदद
विमानों का रखरखाव और मरम्मत विमानन कंपनियों के परिचालन खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। देश में आधुनिक एमआरओ सुविधाएं विकसित होने से विदेशी केंद्रों पर विमानों को भेजने से जुड़ी लागत और समय कम करने में मदद मिल सकती है।
एयर इंडिया की यह पहल विमानन परिचालन को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर तकनीकी क्षमताओं के विकास में भी योगदान दे सकती है।
भारत को वैश्विक एमआरओ केंद्र बनाने की दिशा में कदम
भारत में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने के साथ विमानों के रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी सेवाओं की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में आधुनिक एमआरओ केंद्रों का विकास घरेलू विमानन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
देश में इस क्षेत्र की क्षमता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों को भी भारत में रखरखाव सेवाएं उपलब्ध कराने के अवसर मिल सकते हैं। इससे विमानन क्षेत्र में निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।