110 महिलाओं ने श्वेत वस्त्र धारण कर निकाली शोभायात्रा, डॉ. राजेंद्र रंगीला के सांस्कृतिक कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब

तिल्दा-नेवरा। बैकुंठ स्थित जोगी कुआँ सतनाम धाम में विजयादशमी का पर्व श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। पर्व के अवसर पर ग्राम बहेसर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें 110 महिलाओं ने श्वेत वस्त्र धारण कर हिस्सा लिया। डीजे की धुन पर उत्साहपूर्वक थिरकते हुए श्रद्धालु पालो लेकर जोगी कुआँ सतनाम धाम पहुंचे। शोभायात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा।

शोभायात्रा में दिखी श्रद्धा और सामाजिक एकजुटता

ग्राम बहेसर से निकली शोभायात्रा आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। श्वेत वस्त्रों में शामिल महिलाओं और पालो लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूरे वातावरण को सतनाममय बना दिया। शोभायात्रा में समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपनी धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता का परिचय दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में उमड़ी भीड़

विजयादशमी के अवसर पर जोगी कुआँ धाम के सांस्कृतिक मंच पर डॉ. राजेंद्र रंगीला का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दर्शकों की भीड़ से पूरा मैदान खचाखच भरा रहा। आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी सतनामी समाज के लोग मेले में शामिल हुए और पर्व की खुशियां साझा कीं।

शोभायात्रा, श्रद्धालुओं की सहभागिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष बना दिया। पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह और सामाजिक सौहार्द का वातावरण देखने को मिला।

समाज के अनेक पदाधिकारी और नागरिक हुए शामिल

कार्यक्रम में ग्राम बहेसर की सरपंच श्रीमती सविता सेवक बर्मन सहित साधेलाल डहरिया, बिसराम कुर्रे, लालाराम गेंडरे, शिवकुमार टंडन, चरण दास चेलक, कृष्णा राय, रोमदास बर्मन, रुवेल सोनवानी, देवेंद्र बघेल, रोहित आडील, कबीर चेलक, सुधीर चेलक, संजू चेलक, भगवती भारती, विनोद गायकवाड़, भगवान दास सोनवानी, रामकुमार लहरे, गंगाराम बंजारे, दिनेश बंजारे, गोविंद बर्मन, मनोज कुर्रे और ताराचंद बंजारे सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की जानकारी एवं संचालन धर्मगुरु बालकदास सतनाम सेवा समिति के अध्यक्ष तथा भाजपा तिल्दा ग्रामीण के महामंत्री अधिवक्ता दिनेश गायकवाड़ ने किया।

जोगी कुआँ सतनाम धाम में आयोजित विजयादशमी पर्व ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की भावना को सशक्त किया। श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को यादगार बना दिया।

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