प्रतापगढ़ । उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के बेती महल में विजयादशमी के अवसर पर पारंपरिक शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। 20 अक्टूबर को हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में देसी और विदेशी हथियार सजाकर उनकी पूजा की गई। आयोजन के वीडियो सामने आने के बाद यह कार्यक्रम चर्चा में है। हथियारों की संख्या और इससे जुड़े पुराने विवाद को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
शस्त्र पूजन में दिखाई दिए सैकड़ों हथियार
दशहरे के अवसर पर बेती महल परिसर में आयोजित शस्त्र पूजन में छोटी-बड़ी बंदूकें और अन्य असलहे सजाए गए। सामने आए वीडियो के आधार पर आयोजन में 500 से अधिक हथियार होने का दावा किया जा रहा है।
राजा भैया की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इनमें करीब 30 हथियार उनके और उनके परिवार के हैं, जबकि बाकी हथियार समर्थकों के बताए गए हैं। आयोजकों ने दावा किया कि पूजा में शामिल सभी हथियार लाइसेंसी हैं।
राजा भैया ने बताया भारतीय परंपरा का हिस्सा
राजा भैया की ओर से इस आयोजन को विजयादशमी से जुड़ी पुरानी भारतीय परंपरा बताया गया। उनके अनुसार, दशहरे पर शस्त्र पूजन का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
उन्होंने स्वदेशी परंपराओं और भारतीय पहनावे को बढ़ावा देने की बात भी कही। आयोजन में शामिल लोगों के धोती-कुर्ता पहनने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि त्योहारों के अवसर पर पारंपरिक भारतीय वस्त्र अपनाने चाहिए, ताकि देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखा जा सके।
पत्नी भानवी सिंह के आरोपों से जुड़ा पुराना विवाद
राजा भैया के शस्त्र पूजन को लेकर विवाद की एक वजह उनकी पत्नी भानवी सिंह की ओर से पहले लगाए गए आरोप भी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जून 2025 को भानवी सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर राजा भैया के पास कथित तौर पर अवैध विदेशी हथियारों का जखीरा होने का आरोप लगाया था।
इसके बाद राजा भैया की ओर से सफाई दी गई थी कि उनके पास मौजूद हथियार वैध हैं और उनके लाइसेंस हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ हथियार उनके परिवार और सुरक्षाकर्मियों के नाम पर हैं, जबकि अन्य उनके समर्थकों के हैं।
हालांकि, इन आरोपों और दावों के संबंध में किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
परंपरा या शक्ति प्रदर्शन, आयोजन पर चर्चा
बेती महल में शस्त्र पूजन को राजा भैया के समर्थक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में हथियारों के एक साथ प्रदर्शन के कारण इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
फिलहाल, आयोजन को लेकर चर्चा का केंद्र हथियारों की संख्या, उनके लाइसेंस और पहले लगाए गए आरोप हैं। इस मामले में आयोजकों के दावों और संबंधित आधिकारिक जानकारी के बीच स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।