जामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर भूख हड़ताल, सात सदस्यीय समिति गठित; जानिए क्या हैं छात्रों की मांगें

नई दिल्ली । दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर विद्यार्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। 12 अक्टूबर से शुरू हुए प्रदर्शन के दौरान चार छात्र भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर विचार करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में छात्र संघ की बहाली, निलंबित और निष्कासित छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस लेना तथा मुख्य अनुशासन अधिकारी का इस्तीफा शामिल है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

2006 से क्यों नहीं हुए छात्र संघ के चुनाव?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। विश्वविद्यालय में वर्ष 1996 के बाद दिसंबर 2005 में छात्र संघ के चुनाव कराए गए थे। इसके बाद 31 मार्च 2006 को छात्र संघ कार्यालय को सील कर दिया गया। तब से विश्वविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव नहीं हो सके हैं।

विद्यार्थियों का कहना है कि छात्र संघ उनकी समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने और उनके अधिकारों का प्रतिनिधित्व करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। छात्र संघ के अभाव में विद्यार्थियों को अपनी मांगें सामूहिक रूप से उठाने और प्रशासन के सामने रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

क्या हैं छात्रों की तीन प्रमुख मांगें?

भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।

पहली मांग: छात्र संघ की बहाली

विद्यार्थियों की मांग है कि जामिया में छात्र संघ को फिर से बहाल किया जाए और निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वे विश्वविद्यालय से जुड़ी समस्याओं को उचित मंच पर उठा सकें।

दूसरी मांग: निलंबन और निष्कासन वापस लिया जाए

प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान छात्रों को परिसर से बाहर निकाला गया और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई।

तीसरी मांग: मुख्य अनुशासन अधिकारी का इस्तीफा

विद्यार्थियों ने मुख्य अनुशासन अधिकारी के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों को परिसर से हटाने की कार्रवाई में उनकी भूमिका रही। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष अलग है।

चार छात्र भूख हड़ताल पर क्यों बैठे हैं?

छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से विश्वविद्यालय के सातवें प्रवेश द्वार के भीतर प्रदर्शन शुरू हुआ था। अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के विद्यार्थी जासिम खान और विधि के विद्यार्थी एबिन बासिल पहले दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

इसके चार दिन बाद सामाजिक कार्य विषय के विद्यार्थी रेहान हैदर और भूगोल विषय के विद्यार्थी रेहान खान भी भूख हड़ताल में शामिल हो गए।

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के अनुसार, 17 अक्टूबर की सुबह सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें धरना स्थल से जबरन हटा दिया और परिसर बंद कर दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी वहां पहुंचे और विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।

एबिन बासिल ने आरोप लगाया कि उन्हें एक वर्ष के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया है। विद्यार्थियों ने यह भी दावा किया कि भूख हड़ताल के दौरान उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आवश्यक चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली और उन्होंने स्वयं स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की।

प्रशासन ने बनाई सात सदस्यीय समिति

आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की।

बैठक में कुलपति प्रो. मजहर आसिफ, कुलसचिव प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी, विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, छात्र कल्याण अधिष्ठाता, मुख्य अनुशासन अधिकारी और अन्य अधिकारी शामिल हुए।

प्रशासन के अनुसार, समिति प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से बातचीत करेगी, उनकी मांगों और शिकायतों की जांच करेगी तथा परिसर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए आवश्यक कदम सुझाएगी।

हालांकि, छात्र संघ के चुनाव कब कराए जाएंगे और विद्यार्थियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस ली जाएगी या नहीं, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में चुनाव से मिली प्रेरणा

जामिया के विद्यार्थियों का कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में लंबे अंतराल के बाद छात्र संघ चुनाव की घोषणा से उन्हें प्रेरणा मिली है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के आंदोलन और लंबे समय तक चली भूख हड़ताल के बाद चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। वहां 5 नवंबर को मतदान प्रस्तावित है।

इसी घटनाक्रम के बाद जामिया के विद्यार्थियों ने भी अपने विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि यदि दूसरे विश्वविद्यालय में लंबे अंतराल के बाद चुनाव संभव हैं, तो जामिया में भी छात्र संघ को बहाल किया जाना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

जामिया में जारी आंदोलन के बीच अब विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत पर सबकी नजर है। सात सदस्यीय समिति का गठन प्रशासन की ओर से संवाद की पहल है, लेकिन छात्रों की मुख्य मांगों पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।

विद्यार्थियों का कहना है कि वे छात्र संघ की बहाली, अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और मुख्य अनुशासन अधिकारी के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।

फिलहाल यह विवाद केवल छात्र संघ के चुनाव तक सीमित नहीं है। यह विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व, परिसर में विरोध प्रदर्शन के अधिकार और विश्वविद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में समिति की बातचीत और प्रशासन के फैसले से आंदोलन की दिशा तय होगी।

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