डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्गों को बनाया जा रहा था निशाना, TRAI और पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर देते थे गिरफ्तारी की धमकी

नई दिल्ली । देश में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच राज्यों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के शिकार लोगों को बचाया है। पुलिस ने संदिग्ध बैंक लेनदेन की जांच और समय रहते हस्तक्षेप के जरिए करीब 1.53 करोड़ रुपये की संभावित अतिरिक्त साइबर ठगी को रोकने में सफलता हासिल की। इन मामलों में अधिकांश पीड़ित वरिष्ठ नागरिक थे।

पुलिस के अनुसार, साइबर ठग खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को फोन या वीडियो कॉल करते थे। वे पीड़ितों को किसी आपराधिक मामले में फंसने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते थे। जांच के दौरान संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चलने पर पुलिस टीम ने ऐसे लोगों की पहचान की, जो अब भी ठगों के दबाव में थे।

पांच राज्यों में की गई कार्रवाई

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से जुड़े मामलों में सामने आई। टीम ने संदिग्ध बैंक खातों और पैसों के लेनदेन का विश्लेषण कर पीड़ितों तक पहुंच बनाई। इसके बाद उन्हें समझाइश देकर ठगों को अतिरिक्त रकम भेजने से रोका गया। पुलिस के सामने आए मामलों में कुछ पीड़ित पहले ही लाखों रुपये गंवा चुके थे। इसके बावजूद साइबर अपराधी उनसे लगातार और रकम की मांग कर रहे थे। कई मामलों में ठगों ने पीड़ितों को अपनी बचत निकालने, फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाने और संपत्ति गिरवी रखने तक का दबाव बनाया।

सितंबर से डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसा था बुजुर्ग

दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र में 77 वर्षीय एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने जाल में फंसा रखा था। आरोपियों ने उनसे अतिरिक्त तीन लाख रुपये की मांग की थी और सोना-चांदी गिरवी रखने के लिए भी दबाव बनाया था।

पुलिस टीम ने पीड़ित से संपर्क कर उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। समझाइश, सत्यापन और पुलिस की मदद से वे ठगों के नियंत्रण से बाहर निकल सके। इस कार्रवाई से लगभग 3.48 लाख रुपये के अतिरिक्त संभावित नुकसान को रोकने में मदद मिली।

इसी तरह राजस्थान में 80 वर्षीय कपड़ा कारोबारी पहले ही 18 लाख रुपये गंवा चुके थे। ठग उनसे मकान गिरवी रखकर 10 लाख रुपये और देने की मांग कर रहे थे। पुलिस के हस्तक्षेप से आगे का भुगतान रुक गया।

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी सामने आए मामले

उत्तर प्रदेश में करीब 70 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी को ठगों ने आधार कार्ड को एक विस्फोट मामले से जोड़कर डराया था। दंपती पहले ही लगभग 52 लाख रुपये दे चुके थे। पुलिस के हस्तक्षेप से उनकी 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर अतिरिक्त भुगतान कराने की कोशिश रोक दी गई।

महाराष्ट्र में 65 वर्षीय अस्पताल सहायक से ठग करीब 85 लाख रुपये ऐंठ चुके थे। वे परिवार की फिक्स्ड डिपॉजिट से 55 लाख रुपये और हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। समय पर हस्तक्षेप कर पुलिस ने आगे की रकम भेजने से बचाने में मदद की।

गुजरात में निवेश के नाम पर ठगी की कोशिश

गुजरात में 50 वर्षीय एक कारोबारी ने निवेश समझकर 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। ठगों ने उन्हें कुल एक करोड़ रुपये निवेश करने के लिए तैयार किया था। पुलिस की लगातार समझाइश के बाद कारोबारी ने शेष 75 लाख रुपये ट्रांसफर नहीं किए। इस तरह बड़ी रकम की संभावित ठगी टल गई।

पुलिस ने कहा—कानून में नहीं है डिजिटल अरेस्ट

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई प्रक्रिया नहीं है। कोई भी वास्तविक पुलिस अधिकारी, सीबीआई, एनआईए, ट्राई, आरबीआई या अदालत का अधिकारी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर किसी व्यक्ति से पैसे ट्रांसफर करने अथवा रकम को सुरक्षित रखने के नाम पर भुगतान करने की मांग नहीं करता।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि इस तरह के फोन या वीडियो कॉल आने पर घबराएं नहीं। कॉल करने वाले की बातों में आकर बैंक विवरण, ओटीपी या आधार संबंधी जानकारी साझा न करें। संदिग्ध कॉल मिलने पर परिवार के सदस्यों से चर्चा करें और संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यमों से संपर्क कर सत्यापन करें।

यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए या आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई बताती है कि संदिग्ध लेनदेन की समय पर पहचान और पीड़ितों तक तुरंत पहुंच साइबर अपराध से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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