शहरों को बुनियादी सुविधाओं में निवेश के लिए आकर्षक बनाना जरूरी: निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली  । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश में ऐसे शहरों का विकास करना जरूरी है, जहां शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश के पर्याप्त अवसर हों और स्थानीय निकाय वित्तीय रूप से मजबूत बन सकें। उन्होंने कहा कि शहरों में सड़क, जलापूर्ति, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए निवेश आकर्षित करना समय की आवश्यकता है।

वित्त मंत्री ने शहरी निकायों की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रशासन की लेखा प्रणाली, आय के स्रोत और कर वसूली की व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

शहरी निकायों की वित्तीय व्यवस्था में सुधार पर जोर

निर्मला सीतारमण के अनुसार, शहरों को निवेश के लिहाज से आकर्षक बनाने के लिए उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होनी चाहिए। इसके लिए शहरी निकायों को अपने राजस्व के स्रोत बढ़ाने, कर संग्रह की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और वित्तीय विवरणों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि शहरी विकास के लिए केवल सरकारी सहायता पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्थानीय निकायों को अपनी वित्तीय क्षमता विकसित करनी होगी, ताकि वे बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और रखरखाव के लिए आवश्यक संसाधन जुटा सकें।

सार्वजनिक और निजी निवेश के बेहतर तालमेल की जरूरत

वित्त मंत्री ने शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सार्वजनिक धन और निजी पूंजी के संयुक्त उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी निवेश को बढ़ावा देने का मतलब सार्वजनिक वित्तपोषण का विकल्प तैयार करना नहीं है। बुनियादी सेवाओं और समावेशी विकास के लिए सरकारी निवेश की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

उन्होंने भारत के शहरी बुनियादी ढांचे में जर्मनी के साथ सहयोग और अधिक निवेश की संभावनाओं पर भी जोर दिया। शहरों में बढ़ती आबादी और नागरिक सुविधाओं की जरूरतों को देखते हुए दीर्घकालिक वित्तीय संसाधन जुटाना आवश्यक है।

विकसित भारत के लक्ष्य में शहरों की अहम भूमिका

निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए नगर निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार, वित्तीय अनुशासन और बेहतर परियोजना प्रबंधन आवश्यक है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत वित्तीय व्यवस्था वाले शहर ही बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए दीर्घकालिक निवेश आकर्षित कर सकेंगे। पारदर्शी लेखा प्रणाली, प्रभावी कर संग्रह और राजस्व बढ़ाने के उपायों से शहरी निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

वित्त मंत्री का संदेश स्पष्ट है कि शहरों के सतत विकास के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ मजबूत वित्तीय व्यवस्था, पारदर्शी प्रशासन और सार्वजनिक-निजी निवेश का संतुलन जरूरी है।

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