अहमदाबाद में पहले ब्रिक्स पारंपरिक खेलों का समापन, मल्लखंभ और योगासन ने खींचा ध्यान

अहमदाबाद । भारत की मेजबानी में आयोजित पहले ब्रिक्स पारंपरिक एवं स्वदेशी प्रदर्शन खेलों का सोमवार को अहमदाबाद में समापन हुआ। वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नारनपुरा में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यक्रम में 10 देशों के करीब 160 प्रतिभागियों ने अपने-अपने पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। भारत की ओर से मल्लखंभ, योगासन और कलरीपयट्टू की प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहीं।

मल्लखंभ और योगासन ने दर्शकों को किया आकर्षित

कार्यक्रम में भारतीय खिलाड़ियों ने मल्लखंभ के उच्च तीव्रता वाले प्रदर्शन और लयबद्ध योगासन के जरिए दर्शकों का ध्यान खींचा। मल्लखंभ में खिलाड़ियों ने लकड़ी के खंभे पर संतुलन, लचीलापन और शारीरिक कौशल का प्रदर्शन किया। वहीं, योगासन की प्रस्तुति में शारीरिक नियंत्रण और लय का शानदार समन्वय देखने को मिला।

भारत ने पारंपरिक मार्शल आर्ट कलरीपयट्टू का प्रदर्शन भी किया। इन प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय खेल परंपराओं की विविधता और प्राचीन विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने रखा गया।

चीन, कजाकिस्तान और ब्राजील ने भी दिखाई अपनी खेल परंपरा

ब्रिक्स देशों के प्रतिभागियों ने अलग-अलग तरह के पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया। चीन की ओर से वुशु, लायन डांस और हेल्थ चीगोंग प्रस्तुत किए गए। कजाकिस्तान ने पारंपरिक बोर्ड गेम टोग्यज़कुमलक सहित अन्य खेलों का प्रदर्शन किया, जबकि ब्राजील की ओर से कैपोइरा और ब्राजीलियन जिउ-जित्सु जैसी विधाओं को प्रदर्शित किया गया।

इसके अलावा रूस ने सैम्बो, दक्षिण अफ्रीका ने कगाती और इंटोंगा, ईरान ने जूर्खानेह तथा संयुक्त अरब अमीरात ने अल तब्बाह जैसे पारंपरिक खेलों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत की।

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने दिया सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे।

डॉ. मांडविया ने पारंपरिक खेलों के संरक्षण और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख सुझाव रखे।

  • पारंपरिक खेलों का साझा संग्रह: सदस्य देशों के पारंपरिक खेलों के इतिहास, नियमों, उपकरणों और सांस्कृतिक महत्व का दस्तावेजीकरण करने के लिए स्वैच्छिक ब्रिक्स संग्रह तैयार किया जाए।
  • विशेषज्ञों का आदान-प्रदान: खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाया जाए।
  • भविष्य के आयोजनों में प्रदर्शन: आगामी ब्रिक्स खेल आयोजनों में पारंपरिक और स्वदेशी खेलों के नियमित प्रदर्शन की संभावनाएं तलाश की जाएं।

पारंपरिक खेलों के जरिए सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने की पहल

इस आयोजन का उद्देश्य केवल खेलों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक समझ, आपसी मित्रता और जनस्तरीय संपर्क को मजबूत करना भी था। कार्यक्रम में खेल प्रस्तुतियों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और दर्शकों की भागीदारी से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। समापन पर प्रतिभागी दलों को सम्मानित किया गया।

भारत की मेजबानी में हुए इस आयोजन ने पारंपरिक खेलों को संरक्षित करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में सहयोग का एक साझा मंच उपलब्ध कराया। खेलों के माध्यम से विभिन्न देशों की ऐतिहासिक परंपराओं, स्थानीय ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को सामने लाने पर विशेष जोर दिया गया।

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