मुंबई । घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार लिवाली और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से तेजी देखने को मिली। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स कारोबार के दौरान करीब 700 अंक उछलकर 72,620.91 अंक तक पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी 157.70 अंक यानी 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,521.05 अंक पर कारोबार करता दिखा।
सेंसेक्स 27 अंक की बढ़त के साथ 71,951.73 अंक पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह गिरावट के साथ लाल निशान में पहुंचा, लेकिन जल्द ही इसमें तेजी लौट आई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 72,620.91 अंक का उच्च स्तर छुआ। खबर लिखे जाने के समय यह 482.16 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,406.84 अंक पर था।
आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी
बाजार में तेजी की अगुवाई आईटी कंपनियों के शेयरों ने की। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर करीब 6 प्रतिशत चढ़ा। टीसीएस में साढ़े 5 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में साढ़े 3 प्रतिशत और इंफोसिस में करीब ढाई प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
एचसीएल टेक्नोलॉजीज के अच्छे तिमाही नतीजों और लाभांश की घोषणा से कंपनी के शेयरों में खरीदारी बढ़ी। आईटी क्षेत्र में व्यापक तेजी का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी आईटी सूचकांक करीब 3 प्रतिशत मजबूत रहा।
बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों में भी तेजी
आईटी कंपनियों के अलावा बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एचडीएफसी बैंक और आईटीसी के शेयरों में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त रही। वित्तीय सेवाओं, बैंकिंग, एफएमसीजी, धातु, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और रियल्टी क्षेत्र के सूचकांकों में भी तेजी दर्ज की गई।
हालांकि, सभी क्षेत्रों में खरीदारी का रुख नहीं रहा। मारुति सुजुकी का शेयर एक प्रतिशत से अधिक गिरावट में रहा। मीडिया, फार्मा, स्वास्थ्य और रसायन क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया।
रुपये में मजबूती से निवेश धारणा को सहारा
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार दूसरे दिन मजबूती आने से भी घरेलू बाजार की निवेश धारणा को समर्थन मिला। निवेशकों की आईटी कंपनियों में बढ़ती दिलचस्पी और प्रमुख कंपनियों के बेहतर तिमाही प्रदर्शन ने बाजार को ऊपर उठाने में योगदान दिया।
हालांकि, व्यापक बाजार का रुख मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप-50 और स्मॉलकैप-100 सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे संकेत मिला कि तेजी का प्रमुख लाभ बड़े शेयरों, विशेषकर आईटी कंपनियों, तक सीमित रहा।