शारदीय नवरात्रि 2026: नौ दिनों में मां दुर्गा को लगाएं ये 9 खास भोग, जानें तिथियां और धार्मिक महत्व

नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप को विशेष भोग अर्पित करने का विधान है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा और भोग अर्पित करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।

ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई है और 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ इसका समापन होगा। आइए जानते हैं नौ दिनों की प्रमुख तिथियां, मां दुर्गा के नौ स्वरूप और उनके लिए अर्पित किए जाने वाले विशेष भोग।

शारदीय नवरात्रि 2026 की नौ दिनों की तिथियां

  • 11 अक्टूबर: मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना
  • 12 अक्टूबर: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
  • 13 अक्टूबर: मां चंद्रघंटा की पूजा
  • 14 अक्टूबर: मां कूष्मांडा की पूजा
  • 15 अक्टूबर: मां स्कंदमाता की पूजा
  • 16 अक्टूबर: मां कात्यायनी की पूजा
  • 17 अक्टूबर: मां कालरात्रि की पूजा
  • 18 अक्टूबर: मां महागौरी की पूजा
  • 19 अक्टूबर: मां सिद्धिदात्री की पूजा
  • 20 अक्टूबर: विजयादशमी, दशहरा और दुर्गा विसर्जन

ध्यान दें कि स्थानीय पंचांग और उदयातिथि के अनुसार पूजा-व्रत की परंपराओं में अंतर हो सकता है।

नौ दिनों में मां दुर्गा को कौन-सा भोग लगाएं?

1. पहला दिन: मां शैलपुत्री को चढ़ाएं देसी घी

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता को शुद्ध देसी घी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

2. दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी को अर्पित करें शक्कर

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। इस दिन माता को शक्कर या मिश्री का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे दीर्घायु, संयम और मानसिक शांति की कामना से जोड़ा जाता है।

3. तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा को चढ़ाएं दूध से बनी मिठाई

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। इस दिन दूध, खीर या दूध से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। भक्त माता से जीवन में सुख-शांति और कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

4. चौथा दिन: मां कूष्मांडा को प्रिय है मालपुआ

चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, माता को मालपुए का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा की कामना के साथ पूजा की जाती है।

5. पांचवां दिन: मां स्कंदमाता को चढ़ाएं केला

पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। माता को केले का भोग अर्पित करने की परंपरा है। भक्त परिवार की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए देवी से आशीर्वाद मांगते हैं।

6. छठा दिन: मां कात्यायनी को अर्पित करें शहद

छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन माता को शहद का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में शहद को मधुरता, आकर्षण और तेज का प्रतीक माना जाता है।

7. सातवां दिन: मां कालरात्रि को चढ़ाएं गुड़

सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। माता को गुड़ का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त भय, बाधाओं और विपत्तियों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

8. आठवां दिन: मां महागौरी को अर्पित करें नारियल

आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन नारियल का भोग लगाने की परंपरा है। महाअष्टमी पर कई परिवारों में कन्या पूजन भी किया जाता है। इसे सुख-शांति और परिवार की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है।

9. नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री को चढ़ाएं तिल

नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इस दिन माता को तिल अर्पित करने की धार्मिक परंपरा है। भक्त देवी से सफलता, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं।

यह नौ दिनों की भोग सूची प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भोग तथा पूजा-विधि में कुछ अंतर हो सकता है।

नवरात्रि में क्यों महत्वपूर्ण है मां दुर्गा की उपासना?

शारदीय नवरात्रि को शक्ति की आराधना का प्रमुख पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा के नौ स्वरूप शक्ति, साहस, ज्ञान, धैर्य और सिद्धि के अलग-अलग पहलुओं का प्रतीक हैं। नवरात्रि के बाद विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

भोग लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • भोग श्रद्धा और स्वच्छता के साथ तैयार करें।
  • अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पूजा-विधि का पालन करें।
  • उपवास के दौरान अपनी सेहत और जरूरतों का ध्यान रखें।
  • धार्मिक मान्यताओं को आस्था के रूप में समझें; किसी विशेष भोग से मनोकामना पूरी होने की गारंटी नहीं मानी जा सकती।
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