निर्मला सीतारमण ने सिंगापुर में वैश्विक निवेशकों के साथ की बैठक, भारत में निवेश के अवसरों पर चर्चा

सिंगापुर/नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिंगापुर की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान वैश्विक निवेश फर्मों और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बिजनेस राउंडटेबल बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक का उद्देश्य भारत में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करना और वैश्विक निवेशकों के साथ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, 9 से 11 अक्टूबर तक चलने वाली इस यात्रा में वित्त मंत्री सिंगापुर के राजनीतिक नेतृत्व, प्रमुख उद्योगपतियों और वैश्विक संस्थागत निवेशकों के साथ कई उच्चस्तरीय बैठकें कर रही हैं।

ब्लैकरॉक, टेमासेक और जेपी मॉर्गन समेत दिग्गज कंपनियां शामिल

बिजनेस राउंडटेबल में मिलेनियम पार्टनर्स, ब्रेवन हॉवर्ड, ब्लैकरॉक, पिमको, कार्लाइल, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), टेमासेक, सिटाडेल, जेपी मॉर्गन और डॉयचे बैंक सहित प्रमुख वैश्विक निवेश एवं वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच भारत की आर्थिक संभावनाओं तथा निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।

भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने पर जोर

वित्त मंत्री की बैठकों का प्रमुख उद्देश्य भारत में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना और वैश्विक कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर तलाशना है। चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार एवं निवेश, डिजिटल वित्तीय कनेक्टिविटी, पूंजी बाजार, कराधान, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, कौशल विकास और विमानन शामिल हैं।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारत में अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से लगभग 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है। इससे सिंगापुर भारत के लिए विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।

सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात का कार्यक्रम

अपनी यात्रा के दौरान निर्मला सीतारमण की सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, उपप्रधानमंत्री गन किम योंग और विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन से मुलाकात निर्धारित है।

इसके अलावा, वह GIC, टेमासेक, डीबीएस बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी।

निवेश और आर्थिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती

भारत सरकार राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (NIIF) और गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) जैसे मंचों के माध्यम से विदेशी पूंजी की भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है।

वित्त मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों और उद्योग संगठनों के सहयोग से इच्छुक निवेशकों को भारतीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और राज्य सरकारों से जोड़ने की दिशा में प्रयास करेगा।

निर्मला सीतारमण की सिंगापुर यात्रा को भारत-सिंगापुर आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, वैश्विक निवेश आकर्षित करने और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारी के नए अवसर तलाशने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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