RBI का बड़ा अनुमान: 2026-27 में 7.1% रहेगी GDP ग्रोथ, महंगाई 5.2% रहने की आशंका

मुंबई । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में GDP वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने महंगाई को लेकर चिंता जताते हुए वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को MPC की तीन दिवसीय बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि पहली तिमाही में GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने के बाद आर्थिक गतिविधियों में मजबूती को देखते हुए पूरे वित्त वर्ष के लिए वृद्धि अनुमान को संशोधित किया गया है।

तिमाही आधार पर GDP का अनुमान

RBI के अनुमान के मुताबिक 2026-27 की दूसरी तिमाही में GDP वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रह सकती है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 7.1 प्रतिशत रखा गया है।

केंद्रीय बैंक के मुताबिक वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। दूसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत रहने के संकेत मिले हैं, हालांकि पहली तिमाही की तुलना में इसमें कुछ कमी आई है।

महंगाई का अनुमान बढ़कर 5.2 प्रतिशत

RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई का अनुमान 5.2 प्रतिशत किया है। अगस्त में केंद्रीय बैंक ने महंगाई 5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

तिमाही आधार पर महंगाई के अनुमान में दूसरी तिमाही के लिए 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 5.7 प्रतिशत का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई 5.6 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।

वहीं, खाद्य और ईंधन को छोड़कर मापी जाने वाली कोर महंगाई चालू वित्त वर्ष में 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

अगस्त में 4.8 प्रतिशत रही खुदरा महंगाई

RBI गवर्नर ने बताया कि जुलाई में 4.5 प्रतिशत रही खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। इसके पीछे मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी रही।

चीनी और प्याज जैसी कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त में ईंधन महंगाई में भी मामूली बढ़ोतरी हुई। इसी अवधि में कोर महंगाई 4.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि इससे पहले लगातार तीन महीनों तक यह 3.9 प्रतिशत पर बनी हुई थी।

कमजोर मानसून और अल-नीनो से जोखिम

RBI ने निकट भविष्य में महंगाई के मोर्चे पर आपूर्ति संबंधी दबाव बने रहने की आशंका जताई है। कमजोर मानसून, अल-नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को इसके प्रमुख जोखिमों में शामिल किया गया है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार खाद्य वस्तुओं समेत कई कमोडिटी की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने के संकेत हैं। कमजोर मानसून और अल-नीनो की स्थिति आने वाले रबी मौसम और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकती है।

निवेश और विनिर्माण को लेकर सकारात्मक संकेत

RBI ने कहा कि लागत संबंधी दबाव के बावजूद विनिर्माण गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने, निजी पूंजीगत व्यय में सुधार और मजबूत ऋण उठाव पर लगातार जोर दिए जाने से निवेश गतिविधियों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं और घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या जैसे कुछ क्षेत्रों में कमजोरी के संकेत भी मिले हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों का असर घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने की आशंका RBI ने जताई है।

कुल मिलाकर, RBI ने आर्थिक विकास के मोर्चे पर भारत की स्थिति को मजबूत बताया है, लेकिन बढ़ती महंगाई, मौसम संबंधी जोखिम और वैश्विक अनिश्चितताओं को आने वाले महीनों के लिए प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया है।

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