राहुल गांधी के ‘सत्याग्रह’ ऑफर पर CJP का इनकार, कांग्रेस और CJP के बीच क्यों बढ़ी दूरी?

नई दिल्ली । राहुल गांधी के डिजिटल ‘सत्याग्रह’ अभियान के बाद कांग्रेस और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के बीच बढ़ती दूरी चर्चा में है। दोनों संगठन बीजेपी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन साथ आने के बजाय दोनों पक्षों के समर्थकों और नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर बयानबाजी तेज हो गई है।

मामला 3 अक्टूबर को राहुल गांधी के उस पोस्ट के बाद गरमाया, जिसमें उन्होंने देशभर में अलग-अलग मुद्दों पर चल रहे आंदोलनों को एक मंच से जोड़ने की बात कही थी। राहुल गांधी ने कहा था कि उनका ‘सत्याग्रह’ अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है और यह अलग-अलग आंदोलनों के साथ खड़ा रहेगा।

CJP की प्रतिक्रिया से बढ़ा विवाद

राहुल गांधी ने अपने संदेश में किसी संगठन का नाम नहीं लिया था। हालांकि, इसके बाद CJP से जुड़े आशुतोष रांका और सौरव दास की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आईं। इनमें एक ‘स्वघोषित लिबरल’ समूह पर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया।

सौरव दास ने अपनी पोस्ट में बीजेपी के अलावा एक अन्य राजनीतिक दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वर्ग खुद को भारत और संविधान को बचाने का एकमात्र जिम्मेदार मानता है और युवाओं को अपने तरीके से आंदोलनों का नेतृत्व करने देना चाहिए।

इन टिप्पणियों को कांग्रेस से जोड़कर देखा गया और इसके बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से CJP पर सवाल उठाए गए।

कांग्रेस ने उठाया पुराना मुद्दा

कांग्रेस प्रवक्ता रीतम सिंह ने दावा किया कि असम में CJP के स्कूल ऑडिट अभियान के दौरान संगठन से जुड़े लोगों की हिरासत के समय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई में मदद की थी। कांग्रेस की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद CJP के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई से मुलाकात से इनकार किया।

हालांकि, CJP से जुड़े लोगों ने कांग्रेस के इन आरोपों पर अलग रुख अपनाया है और संगठन की स्वतंत्र पहचान को महत्वपूर्ण बताया है।

असली विवाद नेतृत्व और क्रेडिट का?

कांग्रेस और CJP के बीच मतभेद का एक बड़ा कारण आंदोलनों की नेतृत्व भूमिका और क्रेडिट को माना जा रहा है। CJP खुद को राजनीतिक दलों से अलग एक विकेंद्रीकृत आंदोलन के रूप में पेश करती है।

वहीं, कांग्रेस देशभर में अलग-अलग मुद्दों को अपने ‘सत्याग्रह’ अभियान से जोड़ने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के अभियान का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना बताया गया है।

इसी बीच CJP समर्थकों का रुख है कि युवाओं के आंदोलनों को किसी राजनीतिक दल के नेतृत्व या नियंत्रण में नहीं आना चाहिए।

स्कूल और शिक्षा के मुद्दे पर भी टकराव

दोनों पक्षों के बीच मतभेद केवल चुनाव आयोग के मुद्दे तक सीमित नहीं हैं। CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान कांग्रेस ने भी सरकारी स्कूलों से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई।

इसके बाद CJP की ओर से कांग्रेस पर उसके मुद्दों और अभियान की नकल करने के आरोप लगाए गए। दूसरी ओर, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी दोनों संगठनों के बीच टकराव को लेकर असहमति जताई है।

कांग्रेस नेता तुषार गांधी ने कहा कि कांग्रेस, CJP और AISA एक ही विरोधी के खिलाफ लड़ रहे हैं और ऐसे समय में एक-दूसरे पर निशाना साधने के बजाय साझा मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

मुद्दे समान, रास्ते अलग

फिलहाल कांग्रेस और CJP दोनों बीजेपी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। दोनों की ओर से पहले भी कुछ समान मुद्दों को लेकर अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए गए हैं।

लेकिन CJP अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दे रही है, जबकि कांग्रेस अपने ‘सत्याग्रह’ मंच के जरिए अलग-अलग आंदोलनों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

ऐसे में राहुल गांधी के अभियान के बाद सामने आई बयानबाजी ने दोनों के बीच नेतृत्व, राजनीतिक पहचान और आंदोलनों के नियंत्रण को लेकर मतभेद को और स्पष्ट कर दिया है। आने वाले समय में यह टकराव साझा मुद्दों पर उनके सहयोग को किस तरह प्रभावित करता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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