कोलकाता । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान हटाए गए नामों को लेकर दाखिल अपीलों की सुनवाई में तकनीकी अड़चनें सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR से जुड़ी अपीलों की सुनवाई कर रहे ट्रिब्यूनल के जजों ने चुनाव आयोग के पोर्टल में कई कमियों की ओर इशारा किया है।
ट्रिब्यूनल जजों का कहना है कि पोर्टल में नोटिस भेजने, अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड करने, ऑनलाइन सुनवाई करने और फैसले के बाद मतदाता का नाम दोबारा बहाल करने जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इन तकनीकी समस्याओं के कारण अपीलों के समय पर निपटारे में परेशानी होने की बात कही गई है।
नोटिस भेजने की सुविधा नहीं
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रिब्यूनल के जजों ने 11 अगस्त को चुनाव आयोग और कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने पोर्टल से जुड़ी अपनी शिकायतें रखी थीं।
जजों के अनुसार, पोर्टल पर अपीलकर्ता या दूसरे पक्ष को औपचारिक नोटिस भेजने की सुविधा नहीं है। इसके चलते कई ट्रिब्यूनल जिला प्रशासन या जिला निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से ईमेल से नोटिस भेजने की कोशिश कर रहे हैं।
दस्तावेज और ऑनलाइन सुनवाई में भी दिक्कत
ट्रिब्यूनल के मुताबिक, अगर किसी अपील में अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत हो तो उन्हें पोर्टल पर सुरक्षित रखने या अपलोड करने की उचित व्यवस्था नहीं है।
इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करने की सुविधा भी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होने की शिकायत की गई है। जजों का कहना है कि इससे उन मामलों में परेशानी बढ़ रही है, जिनमें ऑनलाइन सुनवाई की जरूरत हो सकती है।
फैसला होने के बाद नाम बहाल करने का विकल्प नहीं
सबसे महत्वपूर्ण शिकायतों में से एक मतदाता का नाम दोबारा बहाल करने से जुड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि ट्रिब्यूनल किसी मतदाता के पक्ष में फैसला देता है तो पोर्टल पर उसका नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने का विकल्प उपलब्ध नहीं है।
इसी तरह, ट्रिब्यूनल के फैसले की कॉपी अपीलकर्ता को पोर्टल से डाउनलोड करने की सुविधा भी नहीं होने की बात कही गई है।
कागजी अपीलों के डिजिटाइजेशन पर भी सवाल
ट्रिब्यूनल जजों ने उन लोगों की अपीलों को लेकर भी चिंता जताई है, जिन्होंने कार्यालय में जाकर कागजी रूप में अपील दाखिल की। जजों के मुताबिक, ऐसी अपीलों को पोर्टल पर सही तरीके से दर्ज और डिजिटाइज करने में दिक्कत आ रही है।
उनका कहना है कि यदि ये अपीलें डिजिटल सिस्टम में समय पर दर्ज नहीं होतीं तो संबंधित मामलों की सुनवाई और निपटारे में देरी हो सकती है।
लाखों अपीलें अभी लंबित
चुनाव आयोग की ओर से सितंबर में सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, SIR से संबंधित करीब 38.31 लाख अपीलें दाखिल की गई थीं। इनमें लगभग 22.21 लाख अपीलें उन लोगों की थीं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, जबकि करीब 16.10 लाख अपीलें नाम जोड़ने के खिलाफ थीं।
10 सितंबर तक लगभग 1.26 लाख अपीलों के निपटारे की जानकारी दी गई थी। ऐसे में बड़ी संख्या में मामलों के लंबित रहने के बीच पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को लेकर ट्रिब्यूनल की शिकायत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
SIR प्रक्रिया पर पहले से चल रही कानूनी निगरानी
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है। अदालत के निर्देशों के बाद मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गई और बाद में अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए गए।
अब ट्रिब्यूनल जजों की ओर से सामने आई तकनीकी शिकायतों के बाद चुनाव आयोग के पोर्टल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जजों ने इन समस्याओं को दूर करने की जरूरत बताई है ताकि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई और अपीलों का निपटारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत हो सके।
फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से इन सभी तकनीकी शिकायतों पर विस्तृत जवाब सामने आने का इंतजार है। मामले में आगे यह महत्वपूर्ण होगा कि लंबित अपीलों को किस गति से निपटाया जाता है और पोर्टल की बताई गई कमियों को कब तक दूर किया जाता है।