ज्ञानेश कुमार की कुर्सी पर संकट? पूर्व अफसरों ने पेश की ‘जनता की चार्जशीट’, लगाए 6 आरोप

नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग तेज हो गई है। पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार, 5 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जनता की ओर से महाभियोग नोटिस’ और चार्जशीट पेश की।

प्रतिनिधिमंडल ने संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार पर ‘सिद्ध कदाचार या अक्षमता’ का आरोप लगाया और उन्हें पद से हटाने की मांग की। डेलीगेशन का दावा है कि उनके कामकाज से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

चार्जशीट में छह प्रमुख आरोप

महाभियोग नोटिस में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कुल छह आरोप लगाए गए हैं। इनमें चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज से लेकर मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया तक कई मुद्दे शामिल हैं।

1. चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज को कमजोर करने का आरोप

चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कई महत्वपूर्ण फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों से पर्याप्त चर्चा किए बिना लिए। प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि इससे चुनाव आयोग के सामूहिक और निष्पक्ष तरीके से काम करने पर सवाल खड़े हुए।

2. फॉर्म-6 में बिना कानूनी अनुमति बदलाव का आरोप

दूसरा आरोप मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से जुड़ा है। आरोप है कि फॉर्म में बिना उचित कानूनी अनुमति के बदलाव किए गए, जिससे मतदाताओं के लिए सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया मुश्किल हुई।

3. ECINET के जरिए वोटर लिस्ट पर नियंत्रण का आरोप

चार्जशीट में ECINET के जरिए मतदाता सूची से संबंधित काम का नियंत्रण केंद्रीय स्तर पर करने का भी आरोप लगाया गया है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इससे इलेक्ट्रोल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की वैधानिक भूमिका कमजोर हुई, जबकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की जिम्मेदारी कानून के तहत ERO की होती है।

4. SIR से बड़ी संख्या में मतदाताओं के प्रभावित होने का आरोप

ज्ञानेश कुमार पर Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि पर्याप्त तैयारी, प्रशिक्षण और व्यापक परामर्श के बिना प्रक्रिया शुरू की गई और मतदाताओं पर अपनी पात्रता साबित करने का अतिरिक्त बोझ डाला गया।

चार्जशीट में दावा किया गया है कि इसके चलते 13.3 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं और गरीबों, प्रवासियों, महिलाओं तथा बुजुर्गों पर इसका ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।

5. चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

पांचवें आरोप में ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि उनके बयानों और कथित राजनीतिक भाषा के कारण चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी संवैधानिक संस्था के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठे।

6. कानूनी दायित्वों के उल्लंघन का आरोप

छठे आरोप में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कई मामलों में चुनाव से जुड़े कानूनों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। प्रतिनिधिमंडल ने इसे उनके संवैधानिक और कानूनी दायित्वों के निर्वहन में विफलता बताया है।

कई पूर्व अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल

महाभियोग नोटिस और चार्जशीट पर पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव गोपाल कृष्ण पिल्लै, पूर्व विशेष निदेशक IB एवं पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद, पूर्व राजदूत अशोक शर्मा, योगेंद्र यादव, आइशी घोष, एन. साई बालाजी, अंजलि भारद्वाज समेत कई पूर्व अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर बताए गए हैं।

डेलीगेशन के चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचने से पहले वहां जाने वाले रास्तों पर पुलिस बैरिकेडिंग किए जाने की भी बात सामने आई।

फिलहाल लगाए गए आरोप प्रतिनिधिमंडल के दावे हैं। इन आरोपों पर चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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