रायपुर । बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने श्री सत्य साईं अन्नपूर्णा ट्रस्ट के सहयोग से ‘साईंश्योर न्यूट्रिशन कार्यक्रम’ के पायलट प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया।
रायपुर जिले के तीन शासकीय विद्यालयों से शुरू किए गए इस कार्यक्रम के प्रथम चरण में करीब 500 बच्चों को निःशुल्क पोषण सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य, एकाग्रता, सीखने की क्षमता और समग्र विकास को बढ़ावा देना है।
इन तीन स्कूलों से हुई शुरुआत
पायलट प्रोजेक्ट के तहत नवीन प्राथमिक शाला नवागांव, प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल परसदा और शासकीय विद्यालय छेरीखेड़ी के बच्चों को साईंश्योर न्यूट्रिशन उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर अतिथियों ने बच्चों को पोषण सामग्री वितरित कर इसकी औपचारिक शुरुआत की।
पोषण के साथ शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम में श्री सत्य साईं अन्नपूर्णा ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री आनंद कडली, शिक्षा विभाग के अधिकारी, विद्यालयों के शिक्षक, श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल की टीम और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
कार्यक्रम से जुड़े ट्रस्ट के अनुसार वर्तमान में देश के 25 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में एक करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों तक प्रातःकालीन पोषण सेवा पहुंचाई जा रही है।
इस पहल के पीछे यह सोच है कि बच्चों को पर्याप्त पोषण मिलने से उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ पढ़ाई, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को भी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री के दौरे के बाद छत्तीसगढ़ में पहल
छत्तीसगढ़ में इस कार्यक्रम की शुरुआत की दिशा में पहल मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जुलाई 2026 में सत्य साईं ग्राम, मुद्देनहल्ली के दौरे के बाद हुई। इस दौरान उन्होंने सद्गुरु श्री मधुसूदन साईं से मुलाकात की थी।
बैठक में पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई थी। इसके बाद प्रदेश में साईंश्योर न्यूट्रिशन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार की तैयारी
शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पोषित बच्चा ही बेहतर तरीके से सीख सकता है। उन्होंने बताया कि रायपुर जिले के करीब 500 बच्चों के साथ शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों का आकलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के परिणामों के आधार पर भविष्य में इसे राज्य के अन्य क्षेत्रों और अधिक शासकीय विद्यालयों तक विस्तारित किया जा सकता है।
इस पहल का उद्देश्य स्कूली बच्चों को पोषण सहयोग उपलब्ध कराने के साथ उनके स्वस्थ विकास और बेहतर शैक्षणिक क्षमता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।