रायपुर । सिंधी समाज को देश में धर्म आधारित शासन व्यवस्था स्थापित करने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया है। यह आह्वान रायपुर स्थित मसन्द सेवाश्रम के पीठाधीश साईं जलकुमार मसन्द साहिब ने लखनऊ में आयोजित सत्संग एवं सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए किया।
साईं मसन्द ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की शासन व्यवस्था प्राचीन काल से सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि उनके मतानुसार भारत का उद्देश्य विश्व कल्याण और विश्वगुरु की भूमिका निभाना रहा है तथा देश में धर्म, नैतिकता और सुव्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश और समाज के सामने विभिन्न चुनौतियां हैं और इनसे निपटने के लिए संत समाज द्वारा धर्म एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित व्यवस्था को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने सिंधी समाज से इस अभियान में सहभागिता करने का आह्वान किया।
शंकराचार्यों के मार्गदर्शन में अभियान का दावा
साईं मसन्द ने कहा कि देश में धर्म आधारित शासन व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से पूज्य शंकराचार्यों और अन्य संतों के मार्गदर्शन में अभियान संचालित किया जा रहा है। उनके अनुसार, भारत के साथ-साथ विभिन्न देशों में रहने वाले हिंदू कार्यकर्ता भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वे चारों शंकराचार्यों की अध्यक्षता में गठित अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठन परम धर्म संसद 1008 में संगठन मंत्री की भूमिका में हैं। उनके अनुसार, देश में यह अभियान सितंबर 2012 से उनकी पहल पर संचालित किया जा रहा है।
सिंधी समाज के योगदान का किया उल्लेख
साईं मसन्द ने कहा कि सिंधी समाज की धर्म, देश और लोककल्याण के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक संस्कृति के संबंध में अपने विचार रखते हुए कहा कि प्राचीन सिंधी समाज के व्यापारियों ने विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए और उनके माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का भी प्रसार हुआ।
उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की सनातन वैदिक परंपराओं और सामाजिक योगदान को देखते हुए समाज को वर्तमान समय में भी देश और समाज के हित से जुड़े अभियानों में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
लखनऊ के शिव शांति संत आसूदाराम आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में भारत सहित कुछ अन्य देशों में गठित सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।