हिंदुस्तान जिंक के यशद भवन को फिर मिला LEED प्लेटिनम प्रमाणन 100 में से 84 अंक

उदयपुर । हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के उदयपुर स्थित कॉर्पोरेट मुख्यालय यशद भवन ने एक बार फिर सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के अनुसार, 85,000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में फैले इस भवन ने LEED v4.1 Existing Building Operations & Maintenance रेटिंग में 100 में से 84 अंक हासिल कर प्लेटिनम स्तर का प्रमाणन लगातार बनाए रखा है।

कंपनी के मुताबिक, यशद भवन को पहली बार वर्ष 2016 में LEED प्लेटिनम रेटिंग मिली थी। इसके बाद से भवन ने पर्यावरणीय प्रदर्शन और सतत संचालन के क्षेत्र में इस रेटिंग को बरकरार रखा है।

LEED दुनिया की प्रमुख ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग प्रणालियों में शामिल है, जिसमें ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, इनडोर पर्यावरण गुणवत्ता, संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल संचालन जैसे मानकों के आधार पर भवन के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है।

इन मानकों पर किया बेहतर प्रदर्शन

यशद भवन में ऊर्जा-कुशल प्रणालियों, जल संरक्षण, बेहतर इनडोर वायु गुणवत्ता, हरित सफाई व्यवस्था, सस्टेनेबल खरीद प्रक्रिया और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन जैसे उपाय लागू किए गए हैं।

कंपनी के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों में भवन के प्रदर्शन का विवरण इस प्रकार रहा:

  • इंडोर एनवायरनमेंट क्वालिटी: 95.5 प्रतिशत

  • मटेरियल्स एंड रिसोर्सेज: 100 प्रतिशत

  • वॉटर एफिशिएंसी: 86.7 प्रतिशत

  • एनर्जी एंड एटमॉस्फियर: 80 प्रतिशत

  • लोकेशन एंड ट्रांसपोर्टेशन: 78.6 प्रतिशत

‘सस्टेनेबिलिटी विकास का आधार’

हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि कंपनी के लिए सस्टेनेबिलिटी केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि यशद भवन का LEED प्लेटिनम प्रमाणन बनाए रखना कंपनी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा, संसाधनों के पुन: उपयोग, जल संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अपने परिचालन क्षेत्रों में सतत विकास को आगे बढ़ा रही है।

जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा पर फोकस

कंपनी के अनुसार, हिंदुस्तान जिंक वर्तमान में 3.32 गुना वाटर पॉजिटिव है और अपने परिचालन क्षेत्रों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रथाओं का पालन करती है। जल पुनर्चक्रण, संरक्षण और जिम्मेदार जल प्रबंधन के जरिए कंपनी जल संसाधनों के संरक्षण पर काम कर रही है।

कंपनी ने अपने ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाकर 22 प्रतिशत कर दी है और वित्त वर्ष 2028 तक इसे 70 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी के अनुसार, यह प्रयास वर्ष 2050 या उससे पहले नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जैव विविधता और कम-कार्बन परिवहन को भी बढ़ावा

हिंदुस्तान जिंक के अनुसार, कंपनी अपने परिचालन क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और कम-कार्बन लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा दे रही है। ये पहल कंपनी के Sustainability Goals 2030 का हिस्सा हैं, जिनमें जल संरक्षण, जलवायु कार्रवाई, सर्कुलर इकोनॉमी और जिम्मेदार संचालन पर जोर दिया गया है।

कंपनी के मुताबिक, उसे S&P Global Corporate Sustainability Assessment 2025 में लगातार तीसरे वर्ष दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल एवं माइनिंग कंपनी का दर्जा मिला। इसके अलावा वर्ष 2025 में हिंदुस्तान जिंक International Council on Mining and Metals (ICMM) से जुड़ने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी।

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