उदयपुर । हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार खनन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 1,105 हेक्टेयर भूमि का पुनर्स्थापन किया है। कंपनी के अनुसार यह क्षेत्रफल 1,500 से अधिक फुटबॉल मैदानों के बराबर है। कंपनी ने वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 तक करीब 8.5 लाख पौधे लगाए हैं, जिनमें अकेले वित्त वर्ष 2026 में 1.14 लाख पौधे शामिल हैं।
कंपनी के मुताबिक भूमि पुनर्वास, पौधरोपण, जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ भूमि उपयोग उसके सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 का अहम हिस्सा हैं। खनन एवं परिचालन क्षेत्रों में प्राकृतिक वातावरण को पुनर्जीवित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि भविष्य का खनन केवल उत्पादन से नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन से भी पहचाना जाएगा। उन्होंने कहा कि भूमि पुनर्वास, जल संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी कंपनी की कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा हैं।
कंपनी ने राजपुरा दरीबा, चंदेरिया, देबारी और कायड़ में मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया है। वहीं ‘ग्रीन जावर’ पहल के माध्यम से आसपास के समुदायों में हरित विकास और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने का दावा किया गया है।
चंदेरिया में 250 हेक्टेयर की इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन परियोजना
कंपनी ने टेरी के साथ साझेदारी में चंदेरिया स्थित स्मेल्टर परिसर में 250 हेक्टेयर की पारिस्थितिक पुनर्स्थापन परियोजना पर काम शुरू किया है। परियोजना के तहत जारोफिक्स यार्ड के पुनर्वास के साथ प्राकृतिक वन विकसित करने की योजना है।
कंपनी के अनुसार यह पहल औद्योगिक क्षेत्रों में पारिस्थितिक तंत्र के पुनर्निर्माण और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
3.32 गुना वॉटर पॉजिटिव होने का दावा
जल संरक्षण के क्षेत्र में कंपनी ने खुद को 3.32 गुना वॉटर पॉजिटिव संगठन के रूप में प्रमाणित बताया है, जो पहले 2.41 गुना था। राजस्थान जैसे जल-संकट वाले क्षेत्र में परिचालन के बावजूद कंपनी अपनी कुल जल आवश्यकता का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रिसाइकल किए गए सीवेज जल से पूरा करने की बात कहती है।
कंपनी की सभी इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली लागू होने की जानकारी भी दी गई है।
सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 के तहत कंपनी ने वर्ष 2020 के आधार स्तर की तुलना में शुद्ध जल खपत में 50 प्रतिशत कमी लाने और स्मेल्टर संचालन में 100 प्रतिशत निम्न गुणवत्ता वाले जल के उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया है।
नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य
कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भी कंपनी ने कई लक्ष्य तय किए हैं। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल ऊर्जा खपत में लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का रहा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 तक इसे 70 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 530 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एमओयू किए जाने की जानकारी दी गई है।
हिंदुस्तान जिंक ने वर्ष 2030 तक अपने स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तथा स्कोप-3 उत्सर्जन में 25 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी वर्ष 2050 या उससे पहले नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है।
75 प्रतिशत कम कार्बन फुटप्रिंट वाला ‘इकोजेन’ लॉन्च
कंपनी ने हाल ही में लो-कार्बन जिंक ‘इकोजेन’ लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार इसका कार्बन फुटप्रिंट वैश्विक औसत की तुलना में 75 प्रतिशत कम है।
हिंदुस्तान जिंक के अनुसार भूमि पुनर्स्थापन, पौधरोपण, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन उत्पादों से जुड़ी पहलें कंपनी की दीर्घकालिक पर्यावरणीय रणनीति का हिस्सा हैं। इन प्रयासों के जरिए कंपनी ने खनन गतिविधियों के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।