नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। Sensex और Nifty में करीब 1 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलने के कुछ ही समय में BSE का कुल मार्केट कैप करीब 4 लाख करोड़ रुपये घटकर 480 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया।
सुबह 10:26 बजे Sensex 700 से ज्यादा अंक टूटकर करीब 74,050 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि Nifty 50 में 200 से ज्यादा अंकों की गिरावट के बाद यह करीब 23,200 के स्तर पर पहुंच गया। बाद के कारोबार में भी बाजार पर दबाव बना रहा।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में ज्यादा दबाव
बाजार की शुरुआती गिरावट में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। Bajaj Finance के शेयरों में 5 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि Axis Bank और Bajaj Finserv में 3-4 फीसदी तक की कमजोरी रही।
IndiGo, Kotak Mahindra Bank, Asian Paints, HDFC Bank और Trent जैसे शेयर भी शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे। व्यापक बाजार में भी कमजोरी रही और Nifty Midcap 100 तथा Nifty Smallcap 100 में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
क्यों गिरा शेयर बाजार?
बाजार में गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक बताए जा रहे हैं। सबसे प्रमुख वजहों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 19 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचना शामिल है। ऊंची बॉन्ड यील्ड के बीच निवेशकों के लिए डेट इंस्ट्रूमेंट्स आकर्षक हो सकते हैं, जिससे इक्विटी बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति प्रभावित होती है।
इसके अलावा अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा पर दबाव डाला है।
102 डॉलर के पार कच्चा तेल
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। Brent crude की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर महंगाई, व्यापार संतुलन और रुपये पर पड़ सकता है।
रुपये पर भी दबाव देखा गया। हालिया कारोबारी आंकड़ों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और ऊंची तेल कीमतों के बीच बाजार की संवेदनशीलता सामने आई है।
बाजार कब सुधरेगा?
बाजार में सुधार की कोई निश्चित समयसीमा बताना संभव नहीं है। उपलब्ध बाजार विश्लेषण के मुताबिक, निकट अवधि में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक ब्याज दरों की दिशा और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। Economic Times के मुताबिक, विश्लेषकों ने मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई है।
निवेशकों की नजर अब आगामी RBI मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर भी रहेगी। बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक संकेतों के साथ घरेलू ब्याज दर, तरलता और आर्थिक परिस्थितियों में आगे क्या बदलाव आते हैं।
4 लाख करोड़ की गिरावट का मतलब क्या?
बाजार पूंजीकरण में 4 लाख करोड़ रुपये की कमी का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी है। यह कंपनियों के शेयरों के बाजार मूल्य में आई गिरावट को दर्शाता है। शेयर कीमतों में बदलाव के साथ कुल मार्केट कैप बढ़ता-घटता रहता है।
इसलिए बाजार में आई ऐसी गिरावट को मार्केट वैल्यू में कमी के रूप में समझना चाहिए, न कि सीधे तौर पर इतनी राशि के नकद नुकसान के रूप में।