CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आक्रामक रुख, चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली |भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर चल रहे मतभेदों के खुलासे के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति जताई थी। इस खुलासे के बाद कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

प्रमुख बिंदु:

  • विपक्ष का तीखा हमला और मांग: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे ‘देशद्रोह’ (ट्रीजन) करार देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करने और हालिया चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की मांग की है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और राजद सांसद मनोज झा ने भी सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है।

  • क्या है पूरा विवाद? एक अंग्रेजी अखबार की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के मुताबिक, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस, फॉर्म-6 में बदलाव, और नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन जैसे अहम मुद्दों पर दोनों चुनाव आयुक्तों को अंधेरे में रखा गया और उनकी सहमति के बिना फैसले लिए गए।

  • दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियां: रिपोर्ट के अनुसार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने प्रक्रियागत अनियमितताओं, आईटी मॉड्यूल, और अधिकारियों के बिना अनुमति तबादलों व विदेशी दौरों को लेकर 10 महीनों में 14 बार आधिकारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

  • संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 324 और नए कानून के तहत चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों का दर्जा बराबर होता है (‘First among equals’)। यदि मतभेद हो, तो फैसले बहुमत के आधार पर होने चाहिए, लेकिन ताजा खुलासे से यह गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या आयोग के फैसले एकतरफा लिए जा रहे थे।

इस बड़े खुलासे के बाद से देश की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वायत्तता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

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